- गांव और तहसील स्तर पर ढाई से एक घंटे तक की कटौती का बनाया शेड्यूल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बरसात की कमी के चलते जहां बिजली की जरूरत बढ़ी है, वहीं ऊर्जा निगम के सामने भी बिजली का संकट खड़ा हो गया है। जिसको देखते हुए गांव में ढाई घंटे और तहसील में एक घंटे की कटौती लागू कर दी गई है। ऊर्जा निगम के सूत्रों और विभागीय वेबसाइट से उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश में इन दिनों 27 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता है।
इसके विपरीत डेढ़ हजार मेगावाट की कटौती करते हुए 25.5 हजार मेगावाट बिजली की आपूर्ति की गई है। यह डेढ़ हजार मेगावाट बिजली की कटौती गांव और तहसील स्तर पर की गई है। उल्लेखनीय है कि सामान्य तौर पर गांवों में 18 घंटे और तहसील मुख्यालय पर 21 घंटे 30 मिनट बिजली आपूर्ति की जाती है।
अब कटौती लागू होने के बाद गांवों को 15 घंटे 30 मिनट और तहसील को 20 घंटे 30 मिनट बिजली आपूर्ति का शेड्यूल जारी किया गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार मंगलवार को प्रदेश भर में इसी शेड्यूल से आपूर्ति की गई है। हालांकि कटौती से जिला मुख्यालय को अभी अछूता रखा गया है।
प्रदेश को खरीदनी पड़ती है ज्यादातर बिजली
उत्तर प्रदेश में बिजली उत्पादन के चार प्लांट हैं, इनमें अनपारा की क्षमता 2600, ओबरा की क्षमता 900, हरदुआगंज की क्षमता 1100 और पारीछा की क्षमता 900 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। फिलहाल इन चारों प्लांट से चार हजार मेगावाट बिजली ही प्राप्त हो पा रही है। इसके अलावा शेष 23 हजार मेगावाट बिजली अन्य स्रोत से खरीदी जा रही है।

बारिश की प्रदेश भर में हुई भारी कमी के चलते बिजली की डिमांड चरम पर हो गई है। जबकि उत्पादन के अलावा बिजली को खरीदने के लिए धन का संकट भी विभाग के समक्ष खड़ा हुआ है। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सितंबर माह के आने वाले दिनों में प्रदेश को बिजली के संकट से जूझना पड़ सकता है।
उपभोक्ताओं पर बकाया है छह हजार करोड़ रुपये
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पश्चिमांचल के 14 जिलों में 70 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इसमें से सात लाख ऐसे हैं, जिन्होंने कभी भी अपने बिलों का भुगतान नहीं किया है। ऐसे उपभोक्ताओं को नेवर पेड की श्रेणी में रखकर उनसे वसूली के तमाम प्रयास विभाग की ओर से किए जा रहे हैं।
अधिकारी ने बताया कि घरेलू, व्यवसायिक और नलकूप आदि के उपभोक्ताओं की ओर पीवीवीएनएल के छह हजार करोड़ रुपया के बिल बकाया हैं। इन बिलों के भुगतान हो जाने की स्थिति में ऊर्जा निगम बिजली खरीदकर सुचारू रूप से आपूर्ति कर सकता है। इसी कारण इन दिनों अधिकारियों का तमाम फोकस बकाया वसूली पर है।
लाइन लॉस कम करने के लिए गांवों की स्ट्रीट लाइट पर निगाहें
पश्चिमांचल के 14 जिलों में लाइन लॉस कम करने के लिए अब विभाग की नजरें गांवों की स्ट्रीट लाइट तक पहुंच गई हैं। ग्राम प्रधानों को एसडीओ और जेई के माध्यम से संदेश भिजवाया जा रहा है कि गांव में उजाला करने के लिए बिजली का कनेक्शन ले लिया जाए।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि उच्च स्तर पर हुई बैठक के दौरान लाइन लॉस करने के विकल्पों पर हुई चर्चा में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। जिसमें कुछ अधिकारियों ने इस ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि पश्चिमांचल के सभी 14 जिलों के लगभग हर गांव में बिना कनेक्शन लिए स्ट्रीट लाइट जलाई जाती है। इससे विभाग को बड़े पैमाने पर क्षति उठानी पड़ती है।

सूत्रों ने बताया कि इस मामले में निर्णय लिया गया कि एसडीओ और संबंधित क्षेत्र के जेई के जरिये ग्राम प्रधानों को संदेश भिजवाया जाए। जिसमें उनसे ग्राम पंचायत के खर्च पर स्ट्रीट लाइट जलाने के लिए कनेक्शन लेने को कहा जाए।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि अभी पश्चिमांचल में लाइन लॉस 19 प्रतिशत के आसपास है। अगर ग्राम सभाओं में स्ट्रीट लाइट के कनेक्शन लिए जाएं, तो इनसे लाइन लॉस में काफी कमी आ सकती है।
इसी रणनीति के तहत ग्राम प्रधानों तक संदेश भिजवाने का निर्णय लिया गया है। इस बारे में एक अधिकारी ने बताया कि एक निश्चित अवधि के बाद कनेक्शन न लेने वाली ग्राम सभाओं में अभियान चलाया जाएगा। और बिना कनेक्शन स्ट्रीट लाइट जलाने वाले ग्राम प्रधानों के खिलाफ बिजली चोरी की धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

