
प्रसिद्ध दार्शनिक देकार्त से एक बार किसी ने दुर्व्यवहार किया, मगर देकार्त ने उसे कुछ न कहा। इस पर एक मित्र कहने लगे-‘तुम्हें उससे बदला लेना चाहिये था, उसका सलूक बहुत बुरा था।’ वे नर्मी से बोले-‘जब कोई मुझसे बुरा व्यवहार करता है, तो मैं अपनी आत्मा को इस ऊंचाई पर ले जाता हूं, जहां कोई दुर्व्यवहार उसे छू नहीं सकता।’ अमेरिकी सेनापति ग्रांट एक बार कहीं टहलते-टहलते सिगार पी रहे थे। मगर उस स्थान पर धुम्रपान करने की मनाही थी। वहां पहरे पर तैनात नीग्रो चौकीदार ने उनके पास जाकर कहा-‘जनाब, आप यहां सिगार नहीं पी सकते।’ ‘क्यों?’ ग्रांट ने पूछा। ‘यहां सिगार पीना मना है।’ ‘तो क्या तुम्हारा आदेश है कि मैं सिगार न पीऊं?’ ‘जी!’ पहरेदार ने नम्रतापूर्वक, परंतु दृढ़ता से कहा। ‘बहुत अच्छा हुक्म है।’ कहकर ग्रांट ने तुरंत सिगार फेंक दिया। बेंजामिन फ्रैंकलिन के निवृत्त होने पर टामस जेफरसन उनकी जगह फ्रांस में अमरीकी राजूदत बनाए गए। जब वे फ्रांसीसी प्रधानमंत्री से मिले, तो प्रधानमंत्री ने कहा- ‘तो आप श्री फैंकलिन का स्थान लेने आए हैं?’ जेफरसन ने तुरंत उनकी बात काटी-‘उनका स्थान कौन ले सकता है। मैं तो उनका उत्तराधिकारी मात्र बनकर आया हूं।’ जनरल आइजनहोवर द्वितीय विश्वयुद्ध में किसी मोर्चे का निरीक्षण करने गए। वहां का मेजर जनरल उनके संग था बारिश का दिन था और चारों ओर कीचड़ था। आइजन होवर ने छोटे से मंच पर खड़े होकर सैनिकों को संबोधित किया। जब वे मंच से उतरने लगे, उनका पांव फिसल गया और वे कीचड़ में गिर पड़े। इस पर सैनिक खिलखिलाकर हंस पड़े। मेजर जनरल ने आइजनहोवर को सहारा देकर खड़ा किया, और सैनिकों की अशिष्टता के लिए क्षमा मांगी। इसमें क्षमा मांगने की क्या बात है, मेरे भाषण की अपेक्षा, मेरे फिसलने से उनका ज्यादा मनोरंजन हुआ होगा।


