Thursday, February 12, 2026
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ईश्वर की मर्जी

Amritvani


एक बार एक राजा अपने मंत्री के साथ शिकार पर गया। शिकार के लिए तरकश से तीर निकालते समय राजा की अंगुली कट गई। मंत्री ने यह देखकर कहा, ईश्वर जो करता है अच्छा ही करता है। मंत्री के कथन को सुन राजा क्रोधित हो उठा। उसने मंत्री से तुरंत अपने यहां से निकल जाने को कहा। वहां से चलते समय मंत्री ने फिर कहा, ईश्वर जो करता है, अच्छा ही करता है। कुछ दिन बाद राजा पुन: शिकार खेलने गया।

शिकार की खोज में राजा अपने सैनिकों से बहुत दूर निकल गया। गहन जंगल में एक कबीले के लोगों ने राजा को पकड़ लिया। उन्हें देवी को खुश करने के लिए एक नरबलि देनी थी। तभी अचानक उनकी दृष्टि राजा की कटी उंगली पर पड़ी। राजा के अंग भंग होने के कारण उन लोगों ने राजा को छोड़ दिया। राजा को मंत्री की कही बात का अर्थ समझ आ गया। पर मंत्री ने अपने को निकाले जाने पर भी वही कहा था कि ईश्वर जो करता है अच्छा ही करता है।

राजा ने मंत्री को अर्थ जानने के लिए बुला भेजा। मंत्री ने अपने कहे कथनों का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा, महाराज यदि आपने मुझे निकाला न होता तो मैं भी उस दिन शिकार के समय आपके साथ होता और मेरा अंग भंग न होने के कारण उस कबीले के लोग अपनी कुलदेवी को प्रसन्न करने के लिए मेरी बलि अवश्य ही दे देते। राजा की समझ आ गया की जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है।

प्रस्तुति: राजेंद्र कुमार शर्मा


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