जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुरक्षित निवेश के तौर पर माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने बुलियन में खरीदारी बढ़ा दी। चांदी की कीमत 5,380 रुपये बढ़कर 2.25 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि सोने का भाव 1,320 रुपये बढ़कर 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
वैश्विक बाजार का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी की गिरावट रुकती नजर आई और दोनों धातुएं हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर रही थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौते की समयसीमा को एक बार फिर बढ़ाने के फैसले से निवेशकों को अस्थायी राहत मिली। कॉमेक्स पर सोना 0.33% बढ़कर 4,423 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में इसमें करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं चांदी की कीमत 0.29% बढ़कर 68.13 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।
क्यों थमी गिरावट?
डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई को फिलहाल 10 दिनों के लिए टाल दिया गया है। इससे निवेशकों की घबराहट कुछ कम हुई, क्योंकि पिछले एक महीने से जारी संघर्ष ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रखी थी।
सोना और चांदी पर अभी भी दबाव
हालांकि कीमतों में तेजी आई, लेकिन सोना और चांदी पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। पहले, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई का खतरा बढ़ा है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रख सकते हैं। इसके चलते बिना ब्याज वाले एसेट्स जैसे सोना और चांदी की मांग घटती है। दूसरा, डॉलर इंडेक्स लगभग 100 के स्तर पर मजबूत बना हुआ है, और संघर्ष शुरू होने के बाद इसमें लगभग 2.3% की बढ़त आई। मजबूत डॉलर से कमोडिटीज महंगी हो जाती हैं, जिससे उनकी मांग कमजोर पड़ती है। तीसरा, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के केंद्रीय बैंक ने संघर्ष के शुरुआती दो हफ्तों में करीब 60 टन सोना बेचा या स्वैप किया, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
एक महीने में बड़ा झटका
पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से सोने की कीमत करीब 17% गिर चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान सोना पारंपरिक सेफ हेवन की तरह नहीं, बल्कि शेयर बाजार के साथ चलता दिखा और तेल की कीमतों के विपरीत दिशा में रहा।

