- मेडिकल में जल्द शुरू होगा यूरो सर्जरी विभाग, किडनी मरीजों को होगा फायदा
- आर्गन्स ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को सफदरजंग दिल्ली जाना पड़ता है
- कड़े नियमों का करना होता है पालन, केवल दान से ही मिलते हैं आर्गन्स
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: इंसानी शरीर के आर्गन्स, जिनमें किडनी-लीवर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इनसे जुड़े मरीजों को दान पर ही निर्भर रहना पड़ता है। क्योंकि आर्गन्स ट्रांसप्लांट की सुविधा मेरठ में नहीं है तो इसके लिए मरीजों को दिल्ली के बड़े अस्पतालों का रूख करना होता है। अब जल्द ही मेडिकल कॉलेज में यूरो विभाग की शुरूआत होने जा रही है, जिससे मरीजों को आर्गन्स ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलने लगेगी, इसका फायदा यहां की जनता को मिलेगी।
किडनी-लीवर काम न करने पर ट्रांसप्लांट ही है विकल्प
जिन मरीजों को किडनी-लीवर की समस्या होती है और डाक्टर्स इन्हें ठीक करने में नाकाम रहते है तो एकमात्र विकल्प ट्रांसप्लांट ही होता है। ऐसे में मरीजों केवल दान पर ही निर्भर रहना होता है। मरीजों को दान में मिलने वाले आर्गन्स ऐसे इंसान से ही मिल सकते है जो किसी हादसे में गंभीर रूप से घायल हो जाते है। ऐसे में घायल का दिल काम करते रहना जरूरी है जबकि बे्रनडैड (कोमा) होने पर उसके आर्गन्स (किडनी-लीवर) दान दिए जा सकते है। इसके लिए भी कोमा में गए इंसान के परिजनों की सहमति जरूरी होती है।
आर्गन्स के लिए पैसे लेना-देना है अपराध
ऐसे इंसान जो कोमा में होते है और उनका केवल दिल काम कर रहा होता है उनके ही आर्गन्स लिए जा सकते है। इसके लिए सख्त कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है जिसके बाद दान देने पर ही ट्रांसप्लांट संभव होता है। इसमें म्यूचुअल ट्रांसप्लांट भी हो सकता है। जिसमें किसी मरीज को किडनी की जरूरत होने पर उसके रिश्तेदार अपनी किडनी किसी दूसरे को दान दे सकते है जिसका ब्लड ग्रुप मेल नहीं करता। जबकि ऐसे व्यक्ति से किडनी दान में ली जा सकती है जिसका ब्लड ग्रुप मरीज से मेल खाता है, लेकिन यह केवल दिल्ली के बड़े अस्पतालों में ही संभव है, अभी मेरठ में इस तरह की सुविधा नहीं है।
किडनी की मांग सबसे ज्यादा
बताया जा रहा है सौ में से बीस लोग किडनी की बीमारी से ग्रस्त होते हैं। किडनी जन्म से ही खराब हो ऐसा जरूरी नहीं है, यह आपके खान-पान से भी क्षतिग्रस्त हो सकती है। किडनी के सबसे ज्यादा मरीजों में ऐसे लोग है जो नशे के आदि होते है। साथ ही बीमारियों की वजह से भी किडनी-लीवर खराब हो जाते है। युरिन बाहर नहीं निकलने पर भी किडनी फेलियर होने का खतरा होता है। ऐसे में इनके ठीक नहीं होने पर केवल इन आर्गन्स को बदलाना ही विकल्प होता है। या फिर डायलिसिस कराते रहना पड़ता है।
स्वस्थ लोग कर सकते हैं किडनी दान
जो लोग शारीरिक रूप से स्वस्थ होते है वह अपनी मर्जी से अंग दान कर सकते है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि हर इंसान के शरीर में दो किडनी होती है। लेकिन किसी गंभीर स्थिति में किसी को किडनी की जरूरत होती है तो एक किडनी दान की जा सकती है। क्योंकि एक स्वस्थ इंसान एक किडनी पर भी सामान्य जीवन जी सकता है। लेकिन हादसों का शिकार ऐसे इंसान जिनका ब्रेन काम करना बंद कर देता है और दिल काम कर रहा होता है तो ऐसे इंसान के शरीर से भी किडनी-लिवर दान लिया जा सकता है। पूरे शरीर में केवल किडनी, लीवर व आंखों को ही ट्रांसप्लांट किया जा सकता है।
लीवर ट्रांसप्लांट के लिए उम्र की बंदिश नहीं
पूरे शरीर में केवल लीवर ही एकमात्र आर्गन है जिसे किसी भी आयु वाले व्यक्ति से लिया जा सकता है। लीवर के टिशु इस तरह के होते है जो अपने को डवलप कर सकते है। एक तिहाई लीवर को काटकर किसी को लगा दिया जाए तो वह अपने आप पूरा आकार ले लेता है। लीवर दान लेने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती। छोटे बच्चे से लेकर बड़ी आयु का इंसान भी लीवर दान कर सकता है।
ब्लड ग्रुप मैच होने पर ही आर्गन ट्रांसप्लांट किये जा सकते है। मेडिकल में अभी यह सुविधा नहीं है लेकिन हमने शासन को यूरो सर्जरी विभाग स्थापित करने के लिए प्रपोजल भेज दिया गया है। जल्दी ही इसके शुरू होने की उम्मीद है। -डा. वीडी पांडेय, मीडिया प्रभारी मेडिकल कॉलेज।
आर्गन्स ट्रांसप्लांट के लिए दोनों लोग मरीज व दानदाता एक ही परिवार के होने चाहिए। साथ ही इसके लिए पैसे का लेनदेन नहीं होना चाहिए। ब्रेनडैड व्यक्ति से आर्गन्स लिए जा सकते है, इसके लिए सख्त नियम है जिनका पालन करने पर ही ट्रांसप्लांट संभव है।
-डा. अखिलेश मोहन, सीएमओ मेरठ।

