Thursday, March 26, 2026
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दुकान के पीछे सरकारी भूमि ‘मुफ्त’

  • करोड़ों की जमीन पर रसूखदारों का कब्जा, सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण की ‘जनवाणी’ ने की पड़ताल

रामबोल तोमर |

मेरठ: जब अधिकारी अपने कर्त्तव्यों के प्रति उदासीन हो जाए तो सरकारी सम्पत्ति से अपनी आंखें मूंद ले तो बंदरबाट होना लाजिमी है। आंख मूंदने के बदले में धन की प्राप्ति नहीं हो, ऐसा मुमकिन नहीं है। कोई भी अधिकारी व कर्मचारी सरकारी भूमि तो दूर एक कागज भी मुफ्त उपलब्ध नहीं होने देंगे। ऐसे में सरकारी जमीन जो नाले की भूमि सभी दुकानदारों ने अपने-अपने गोदाम बना लिये हैं।

बीस-बीस फुट तक जमीन पर अवैध कब्जे कर लिये हैं। पुराने कब्जे भी हैं, लेकिन वर्तमान में भी अवैध कब्जे किये जा रहे हैं। इस जमीन की वर्तमान में भी बंदरबाट चल रही है। सरकारी जमीन कब्जाने का मामला बेहद गंभीर मामला है। पूर्व के अधिकारियों की जवाबदेही भले ही तय नहीं की जाए, मगर वर्तमान में जो कब्जे किये जा रहे हैं, उनके लिए तो वर्तमान में तैनात अफसरों की जवाबदेही बनती है।

सरकारी जमीन पर कब्जा कराने के पीछे अफसरों की हितपूर्ति साफ जाहिर हो रही है। भाजपा जैसी ईमानदार सरकार तथा कर्त्तव्य निष्ठ माने जाने वाले अधिकारियों के पास कमान है, ऐसे में भी सरकारी जमीन की बंदरबाट हो रही है तो कहीं न कहीं दाल में काला अवश्य है। अफसरों की सत्यनिष्ठा पर भी आंच आना लाजिमी है।

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पीएल शर्मा रोड पर रसूखदार करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जे कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम मौन हैं। मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने भी अवैध निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस तरह से रसूखदार सरकारी जमीन को हथियाते जा रहे हैं। आखिर सरकारी जमीन पर नगर निगम व एमडीए के अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं, यह बड़ा सवाल है। अधिकारियों ने करोड़ों की जमीन पर दीवार व पिलर्स लगाकर कब्जा किया जा रहा है, फिर अधिकारियों की चुप्पी किसी के समझ में नहीं आ रही है।

अतिक्रमण को लेकर जो खूब शोर मचाया जाता हैं, लेकिन जहां पर जमीन पर कब्जे हो रहे हैं, वहां कब्जे रुकवाना तो दूर, नोटिस भी नहीं भेजे जा रहे हैं। इसमें नगर निगम के लेखपाल से लेकर सम्पत्ति अधिकारी तक सेटिंग का महाखेल चल रहा है। यह तब है, जब नगरायुक्त मनीष बंसल बेहद ईमानदार छवि के अधिकारी हैं। एमडीए के अधिकारी भी अवैध निर्माण को नहीं रुकवा पा रहे हैं, कोई तो इस पूरे खेल के पीछे बड़ी सेटिंग चल रही है। पीएल शर्मा रोड पर आईटी सोलूशन (एचपी वर्ल्ड) का शोरूम में हैं। यहां पर आॅन रोड एक लाख रुपये मीटर तक जमीन का मूल्य चल रहा है।

इस शोरूम का पिछला हिस्सा दयानंद नर्सिंग होम के सामने नाले पर लगता है। रसूखदारों का दुस्साहस देखिये कि सरकारी जमीन में नीचे से पिलर लगाकर करीब 50 गज जमीन को कब्जे में ले लिया है। दीवार के साथ ही प्लास्टर भी चल रहा है। क्योंकि निर्माण को पुराना दर्शाने के लिए यह सब खेल चल रहा है। करोड़ों की सरकारी जमीन को किस तरह से रसूखदार कब्जे में ले रहे है और नगर निगम व एमडीए के अधिकारी चुप्पी साधे हैं।

अवैध निर्माण पर एमडीए ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। नोटिस तक रसूखदार को नहीं भेजे गए। रात के अंधेरे में भी काम चल रहा है। आईटी सोलूशन (एचपी वर्ल्ड)के मालिक अवैध तरीके से कब्जाई गयी सरकारी जमीन पर लेंटर भी डाल लेंगे। क्योंकि अभी तक उन्हें रोका-टोका ही नहीं गया, या फिर सेटिंग का खेल चल रहा हैं। इसमें भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है, जिसमें नगर निगम के लेखपाल से लेकर सम्पत्ति अधिकारी तक लिप्त हैं, फिर एमडीए के इंजीनियर भी भ्रष्टाचार की गंगा में खूब हाथ धो रहे हैं।

इसके साथ ही केसर इंटरप्राइजेज समेत करीब दर्जन भर से ज्यादा ऐसे शोरूम है, जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। अब ये लोग सरकारी जमीन पर दीवार लगाकर उसके मालिक बन बैठे हैं, जिस पर कार्रवाई कोई नहीं कर रहा है। यूपी के मुख्यमंत्री माफिया पर बुलडोजर चलाने का दावा तो कर रहे है, लेकिन इन रसूखदारों पर आला अफसर क्यों मेहरबान हैं? आखिर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने की किसने छूट दी? इसमें लिप्त अधिकारियों के खिलाफ भी क्या प्रदेश सरकार कार्रवाई करेगी?

अवैध निर्माण पर होगी सख्त कार्रवाई

एमडीए के जोनल अधिकारी विपिन कुमार ने बताया कि यह अवैध निर्माण उनके संज्ञान में नहीं था। अब उन्हें जानकारी मिली है तो इस पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इसका कोई मानचित्र भी स्वीकृत नहीं है। जो भी पीएल शर्मा रोड पर निर्माण चल रहे हैं, उन्हें सभी को रुकवाया जाएगा।

कहीं एफआईआर तो कहीं पर मेहरबानी

स्मरण रहे एनएच-58 पर स्थित है दो-आब होटल, जिसके अगले हिस्से से होकर नाला जाता है। इस नाले को पाटकर आवागमन के लिए रास्ता बनाया गया था, इसको लेकर नगर निगम के अधिकारियों ने होटल मालिक ज्ञानेन्द्र चौधरी और सचिन चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी थी। इसको लेकर खूब हंगामा हुआ था। होटल के मानचित्र को लेकर भी एमडीए के अधिकारियों ने शिकंजा कस दिया था, लेकिन पीएल शर्मा रोड पर रसूखदार सरकारी जमीन कब्जाकर लेंटर डाल रहे हैं, फिर इन पर मेहरबानी क्यों की जा रही हैं?

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