Saturday, March 14, 2026
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नए कृषि कानून को अहंकार से जोड़ रही सरकार: सुधीर

  • गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड़ सफल बनाने को जनसंपर्क

जनवाणी ब्यूरो |

शामली: नए कृषि कानून को लेकर केंद्र सरकार एवं किसान संगठनों के बीच 11वें दौर की बातचीत असफल होने के बाद 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड को सफल बनाने के लिए उप्र योजना आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर सुधीर पंवार ने जनपद में कई गांवों में किसानों से जनसंपर्क कर परेड में अधिक से अधि संख्या में पहुंचने का आह्वान किया।

सपा के वरिष्ठ नेता और राज्य योजना आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर सुधर पंवार ने शनिवार को जनपद के गांव पलठेडी, कुडाना एवं भनेडा जट में किसानों से जनसम्पर्क किया। इस दौरान किसानों को सम्बोधित करते हुए प्रोफेसर सुधीर पंवार ने कहा कि लाखों किसान घर-बार छोड़कर पिछले 58 दिनों से धरना दे रहे हैं लेकिन मोदी सरकार का अहंकार किसानों पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के 1.5 साल स्थगित रखने के प्रस्ताव से स्पष्ट है कि सरकार को पता है कि नए कानून किसान विरोधी है लेकिन प्रधानमंत्री एवं मंत्रियों ने इस मुद्दे को अहंकार से जोड़ लिया है।

राज्य योजना आयोग के पूर्व सदस्य ने बताया कि आगामी 26 जनवरी की ट्रेक्टर परेड के लिए पंजाब एवं हरियाणा से लाखों की संख्या में किसान दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस आंदोलन में सफलता के लिए उप्र के किसानों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि ट्रेक्टर पर तिरंगा लगाकर दिल्ली पहुंचे और यदि दिल्ली जाना संभव न हो तो जिला एवं तहसील पर होने वाले मार्च में शामिल हो।

परेड जाति-धर्म के नाम पर बांटने वालों पर तमाचा होगी

भाकियू भानु के राष्ट्रीय महासचिव एवं किसान नेता चौ. अनिल मलिक ने कहा कि 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस में किसानों की परेड एक ऐतिहासिक परेड होगी। इस परेड में किसान शांतिपूर्वक एवं तिरंगे झंडे को हाथ में लेकर चलेंगे। यह किसानों की परेड देश को जाति धर्म के नाम पर बांटने वालों के मुंह पर तमाचा होगी। इस परेड में देश का किसान भाईचारा एवं एकता का परिचय देगा।

किसान सरकार को संदेश देगा कि लोकतंत्र में तानाशाही नहीं बल के आपसी समन्वय एवं एक दूसरे का ध्यान रखने की आवश्यकता है। उन्होंने अपील की कि किसान अपनी ट्राली में किसी अनजान व्यक्ति को नहीं बैठने दे। इस आंदोलन में प्रत्येक किसान की जिम्मेदारी बनती है कि वह बराबर की गतिविधियों पर भी नजर रखें ताकि यह गणतंत्र दिवस शांतिपूर्वक किसान व देश मनाएं।

अनेक लोग इस ऐतिहासिक आंदोलन को उग्र करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि यह किसानों की आजादी का आंदोलन टूट सके। ऐसे लोगों के प्रति सचेत रहना पड़ेगा। इसके लिए सभी गांव में संपर्क के माध्यम से समझाया जा रहा है। इस आंदोलन में युवा किसान अपनी ट्राली को पारम्परिक रूप से सजाकर चलेंगे। इस बार की परेड पूरे विश्व में एक मिसाल कायम करेगी।

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