Wednesday, March 18, 2026
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करोड़ों से निर्मित राजकीय विद्यालय खंडहर में तब्दील

  • करीब सात वर्ष पूर्व शुरू हुआ था विद्यालय का निर्माण कार्य
  • सरकार बदलने के बाद से अधर में लटका है कार्य
  • देखरेख के अभाव में बिल्डिंग की हालत हुई खराब

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: एक ओर सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए बड़े बजट पास कर रही है। वहीं, दूसरी ओर सिस्टम की लापरवाही सरकार की कोशिश पर पानी फेर रही है। कई ऐसे विद्यालय हैं जो लापरवाही की भेंट चढ़ रहे हैं। नानू गांव में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा राजकीय विद्यालय लापरवाही के कारण खंडहर हो रहा है। सपा सरकार में शुरू हुआ विद्यालय का कार्य सरकार बदलते ही बंद हो गया।

वर्तमान में निर्माणाधीन विद्यालय की बिल्डिंग खंडहर में तब्दील हो गई है। बिल्डिंग की दीवारें क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। परिसर में चारों ओर गंदगी पसरी हुई है और झाड़ फूंस उग आई है। इतना ही नहीं लोग र्इंटें उखाड़ कर ले गए है। कुछ लोगों ने यहां उपले पाथकर बिटौरे खड़े कर दिए हैं।

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क्षेत्र के लोग लंबे समय से इस विद्यालय के संचालन का सपना देख रहे हैं। मगर अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक इस ओर से पूरी तरह आंखे मूंदे बैठे हैं। यदि विद्यालय को संचालित किया जाए तो बर्बाद हो रहे करोड़ों रुपयों का सद्पयोग हो सकेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।

दरअसल, सपा सरकार में वर्ष 2013-14 में सिवालखास विधानसभा के विभिन्न गांवों में राजकीय विद्यालय बनने का प्रस्ताव पास हुआ था। जिसमें नानू गांव का नाम भी शामिल था। नानू में विद्यालय का निर्माण बड़ी जोर शोर से शुरू हुआ था। ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि उनके बच्चों को बेहतर उच्च शिक्षा मिल सकेगी।

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करीब तीन करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से आसपास गांव के बच्चों को शिक्षा प्रदान कराना था। मगर 2017 में सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा सरकार में आई। कुछ दिन बाद ही भवन निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था सीएनडीएस पर जांच बैठ गई। संस्था को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। तभी से इस विद्यालय का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

विद्यालय का करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। बिल्डिंग पूरी तरह बनकर तैयार खड़ी है। बस फाइनल टच यानी खिड़की दरवाजों और रंगाई-पुताई का कार्य बाकी रह गया था। मगर तभी से यह विद्यालय अपने अच्छे दिनों का इंतजार कर रहा है। सालों से करोड़ों रुपये की लागत से बनी बिल्डिंग खंडहर हो रही है। दीवारें क्षतिग्रस्त होने लगी हैं।

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लोग र्इंटे उखाड़ कर ले गए हैं। इतना ही नहीं उपले पाथकर बिटौरे खड़े कर दिए गए हैं। फिलहाल यह बिल्डिंग असामाजिक तत्वों का अड्डा बनी हुई है। लोगों ने शुरुआती समय में खूब शिकायत की। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब ग्रामीण भी थककर अपने घर बैठ गए हैं।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि कभी तो उनका सपना पूरा होगा। कुल मिलाकर लापरवाही की भेंट यह विद्यालय चढ़ गया। यदि विद्यालय को संचालित किया जाए तो बर्बाद हो रहे करोड़ों रुपये कामयाब हो जाएंगे और आसपास गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी। मगर अफसोस कि कोई इस ओर देखने को तैयार नहीं है।

परिसर में उग आई झाड़ फंूस

अनदेखी के कारण विद्यालय भवन जर्जर होने लगा है। गोबर डालकर लोगों ने कब्जे कर रखे हैं। दीवारों की र्इंटे उखाड़कर ले गए हैं। परिसर में चारों ओर झाड़ फूंस उग आई है और गंदगी पसरी हुई है।

ग्रामीणों के सपने कब होंगे पूरे

सत्ता परिवर्तन के बाद जैसे ही विद्यालय का कार्य रुका तो ग्रामीणों ने भी भागदौड़ शुरू की। ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं ने अधिकारियों से शिकायत की। जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटे। मगर कोई फायदा नहीं हुआ। आखिरकार थक हारकर ग्रामीण अपने घर बैठ गए। एक बेहतर विद्यालय का सपना लिए ग्रामीण इस उम्मीद हैं कि कभी तो उनकी कोई सुनेगा।

पिठलोकर में भी यही हाल

सिवालखास विधानसभा क्षेत्र के पिठलोकर गांव में भी इसी प्रोजेक्ट के तहत कन्या राजकीय विद्यालय का निर्माण किया गया था। यह विद्यालय तो रंगाई-पुताई के साथ तैयार खड़ा है।

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नाम मात्र कार्य ही बिल्डिंग में बाकी रह गया है। मगर यह विद्यालय में भी जांच और लापरवाही की भेंट चढ़ गया। इस परिसर कीहालत भी जर्जर होने लगी है। परिसर में गंदगी पसरी हुई है। झाड़ फूंस के साथ ही बिटौरे खड़े हैं।

सीएम के समक्ष रखा है मुद्दा

सिवालखास विधानसभा क्षेत्र के नानू गांव में ही नहीं कई अन्य गांव में भी राजकीय विद्यालयों का कार्य अधर में लटका हुआ है। उस समय सरकार बदलने पर जांच के उपरांत कार्यदायी संस्था को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था। मेरे द्वारा लगातार विद्यालयों का कार्य पूरा कराने और उनका संचालन कराने की आवाज उठाई जा रही है। शिक्षा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष इस मुद्दे को रखा है।

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कई बार विधानसभा में मैंने इस मुद्दे को उठाया। हाल ही में भी इस मुद्दे को सदन में मुख्यमंत्री के समक्ष रखा था। जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए जवाब में कहा था कि जल्द इन विद्यालयों को संचालित कराया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द विद्यालयों का कार्य पूरा होगा। इसके लिए हर संभव कोशिश की जाएगी। -हाजी गुलाम मोहम्मद, विधायक सिवालखास

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