Monday, April 13, 2026
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‘कोठी अपनी भी बन जाती गर सरकारी नौकर होते’

जनवाणी संवाददाता |

चांदपुर: नगर में आयोजित शायरी की एक शाम कार्यक्रम में आए रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर खूब दाद बटोरी। साहित्यिक रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर साहित्यकारों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान नगर व क्षेत्र के श्रेष्ठ कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया।

शनिवार की रात्रि नगर के आर्य समाज मंदिर में साहित्यिक संस्था साहित्य संगम के तत्वाधान में शायरी की एक शाम नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाने वाले शायर शकील जमाली के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में नगर व क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से आए रचनाकारों में अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।

शनब्बर किरातपुरी की गजल पुराने गम ही कुछ घर में पड़े हैं, कोई ताजा परेशानी नहीं है। मोहब्बत के चिरागों को बुझा दे हवा इतनी तूफानी नहीं है। पर श्रोताओं ने उन्हें जैम कर दादी दी। रचनाकर सुनील साहिल द्वारा प्रस्तुत पंक्तियां दौर कैसा है समझा नहीं वो जो मेरा है वही मेरा नहीं भी श्रोताओ द्वारा खूब पसंद की गई।

कवि सुभाष जावा की रचना अगर हम कोई पत्थर होते पर्वत पर अपने घर होते। कोठी अपनी भी बन जाती गर सरकारी नौकर होते। पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। शेरकोट से आए तैयब आजाद की रचना की पंक्तियां दीवाना तितलियों को बना कर चला गया, झोका हवा का फूल खिला कर चला गया।

श्रोताओं द्वारा खूब पसंद की गई। साहित्यकार आसिफ द्वारा प्रस्तुत अंधेरी रात में जुगनू कमाल करता है, मगर तू आदमी होकर भी मलाल करता है। श्रोताओं ने उन्हें खूब दाद दी। साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं, गीत व शेरों के माध्यम से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन करने के साथ ही वर्तमान परिवेश पर जमकर कटाक्ष किये।

इस दौरान साहित्य संगम संस्था द्वारा देश में पहचान बना चुके कस्बे के रहने वाले शायर शकील जमाली के साथ ही चिकित्सा क्षेत्र में पहचान बनाने वाले डॉक्टर एसएस मिश्रा के साथ ही राजनीति राजा अस्करी रिज़वी, फखरे आलम, अतुल भाटिया, सुरेंद्र अरोड़ा, ज्ञान वर्मा, सतपाल सिंह, अतहर आजमी, अफजाल अहमद, नरेश जावा आदि को सम्मानित किया गया।

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