- यह हताशा या फिर कुछ ओर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिस दल के पास पिछली बार मात्र एक सीट थी, उस दल को देश की सबसे बड़ी पार्टी के केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह न्योता क्यों दे रहे हैं? यूपी में पिछली बार तीन सौ पार सीट रही। केन्द्र में भी पूर्ण बहुमत।
नरेन्द्र मोदी जैसे दिग्गज नेता भी हैं, फिर भी आखिर इस बार क्या हो गया है भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को कि रालोद के राष्टÑीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को न्योता दिया जा रहा हैं? यह हताशा है या फिर कुछ और..? भाजपा इतनी बड़ी पार्टी होने के बावजूद उस दल को न्यौता दे रही है, जिसके पास पिछली बार सिर्फ एक सीट थी, वह भी छपरौली। यही नहीं, एक सीट पर जो विधायक थे, वो भी छोड़कर भाजपा चले गए थे।
अब आखिर क्या परिवर्तन हो गया कि भाजपा के केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह जयंत चौधरी को कह रहे है कि उन्होंने गलत घर चुन लिया हैं। इससे लग रहा है ग्राउंड स्तर पर भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं हैं। क्योंकि वो जयंत चौधरी भी अच्छे लगने लगे हैं, जिनका कोई जनाधार नहीं था। पांच वर्ष में क्या किया? ग्राउंड स्तर पर जमीन खिसक गई हैं। तमाम किसान नेता जो अच्छे नहीं लगते थे, किसानों के घर जाना पड़ रहा है।
650 वर्ष के इतिहास को याद करना पड़ रहा हैं। क्या नया युवा धर्म और मंदिर से जुड़ा हैं, इसको लेकर बड़ा सवाल उठ रहा हैं। कहा जा रहा है कि युवाओं में मंदिर-मस्जिद को लेकर नहीं, बल्कि रोजगार दिखाई दे रहा हैं। ग्राउंड स्तर पर जो चल रहा है, शायद उसे भाजपा समझ नहीं रही हैं। ग्राउंड स्तर पर बदलाव चल रहा हैं, जिसको समझना होगा। जाट बिरादरी के लोग भाजपा के प्रत्याशियों का विरोध कर रहे हैं, यह हो क्या रहा हैं। सिवालखास में मनिंदरपाल भाजपा प्रत्याशी हैं, उनका विरोध हो रहा हैं।
आखिर चल क्या रहा हैं, उनकी गाड़ियों के काफिले में भी तोड़फोड़ कर दी गई थी। मनिंदरपाल एक ऐसे प्रत्याशी है, जो वर्तमान में कोपरेटिव बैंक के चेयरमैन भी हैं और इससे पहले जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ग्रामीण स्तर पर उनकी पकड़ रही हैं, उनका विरोध होना बड़ी बात हैं। इसी तरह से भाजपा के फायर ब्रॉड नेता संगीत सोम का दौराला में तब विरोध हुआ जब उनकी गाड़ियों का काफिला दौराला में एंट्री कर रहा था।
इसमें मुकदमा भी दर्ज हुआ हैं, विरोध करने वालों के खिलाफ। अब नया वीडियो वायरल हुआ है, जो हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक का बताया जा रहा है। इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने तूफान खड़ा कर दिया हैं। राज्यमंत्री दिनेश खटीक को किस तरह से विरोध का सामना करना पड़ रहा हैं।
यही नहीं, किठौर से भाजपा विधायक सत्यवीर त्यागी को भी जाटों के गांवों में विरोध का सामना करना पड़ रहा हैं। सत्यवीर त्यागी के सामने सबसे बड़ी समस्या उनकी बिरादरी ने पैदा कर दी हैं। त्यागी बिरादरी का एक बड़ा खेमा उनका विरोध पर उतर आया हैं। गुर्जरों में भी उनके खिलाफ नारेबाजी हुई हैं। किसान आंदोलन के चलते ही पश्चिमी यूपी में भाजपा का विरोध मुखर हुआ।
आज जाट बेल्ट में घूमेंगे गठबंधन नेता
यूपी चुनाव के पहले चरण में ही भाजपा ने मुजफ्फरनगर के साम्प्रदायिक दंगे का जिन्न बोतल से बाहर निकाल लिया है।
भाजपा के इस जिन्न की हवा को चुनावी फिजा से दूर बनाए रखने के लिए गठबंधन के नेताओं की जोड़ी बुधवार को जाट बेल्ट में प्रचार को मैदान में रहेगी। जाट बेल्ट को मथने के लिए अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के संयुक्त चुनावी रथ का पहिया शामली से शुरु होकर लोनी विधानसभा तक घूमेगा। बुधवार को चुनाव प्रचार के लिए गठबंधन के नेता अखिलेश-जयंत की जोड़ी हिंडन एयरपोर्ट गाजियाबाद से उड़ान भरेगी।
उनका उड़न खटौला शामली में उतरेगा और शामली में प्रेस कान्फ्रेंस करने के बाद दोनों नेता यहीं से चुनावी रथ पर सवार होकर प्रचार को निकलेंगे। अखिलेश-जयंत का चुनावी रथ शामली से कांधला, ऐलन, बड़ौत, बागपत होते हुए लोनी विधानसभा पहुंचेगा। लोनी में गठबंधन प्रत्याशी मदन भैय्या के समर्थन में कार्यकर्ताओं की बैठक को दोनों नेता संबोधित करेंगे और उसके बाद दिल्ली के रवाना हो जाएगें।
जाट बाहुल आधा दर्जन सीट पर होगा प्रचार
अखिलेश यादव-जयंत चौधरी की जोड़ी बुधवार को वेस्ट यूपी के तीन जिलों की छह विधानसभा सीटों पर चुनावी रथ से प्रचार करेंगी। इनमें शामली, थानाभवन, छपरौली, बड़ौत, बागपत और लोनी विधानसभा सीट शामिल है। यह सभी सीटें जाट बाहुल मानी जाती हैं। इन आधा दर्जन सीटों पर एक साथ प्रचार से वेस्ट यूपी में किसानों के बीच गठबंधन की बनी पैठ को बरकरार रखना है। शामली-बागपत क्षेत्र की चुनावी हवा का पूरे वेस्ट यूपी में असर होता है। इसी के मद्देजनर सपा-रालोद नेता की जोड़ी इस जाट बेल्ट को मथने आ रही है।

