नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। देश की आर्थिक दिशा को लेकर सकारात्मक खबर आई है। एसबीआई रिसर्च (SBI Research) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2026 (FY26) में वस्तु एवं सेवा कर (GST) से होने वाली आय सरकार के बजटीय अनुमानों से अधिक रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी दरों के पुनर्गठन के बाद भी कर संग्रह मजबूत बना रहेगा, जिससे भारत की कर प्रणाली की स्थिरता और अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलता है।
बजटीय अनुमान से ज्यादा होगा जीएसटी संग्रह
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार “हम अनुमान लगाते हैं कि FY26 में जीएसटी संग्रह बजट में तय अनुमान से अधिक रहेगा। दरों में हालिया पुनर्गठन के बावजूद अधिकांश राज्यों को शुद्ध लाभ होगा।” रिपोर्ट में यह आकलन जीएसटी परिषद द्वारा जारी विकास दर के अनुमानों और पिछले वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर किया गया है।
राज्यों को हुआ फायदा
सितंबर 2025 में लागू नए जीएसटी दर पुनर्गठन के तहत अब चार कर दरें लागू हैं —
0%, 5%, 18% और 40%।
एसबीआई रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार महाराष्ट्र को इस बदलाव से करीब 6% का लाभ होगा। कर्नाटक को 10.7% तक की बढ़ोतरी मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, अधिकांश राज्य ‘नेट गेनर’ यानी लाभार्थी रहेंगे।
पिछले आंकड़ों से मिला भरोसा
रिपोर्ट में कहा गया कि पहले भी दरों में संशोधन के बाद जीएसटी संग्रह में शुरुआती महीनों में हल्की गिरावट आई थी, लेकिन जल्द ही स्थिति सुधर गई।
जुलाई 2018 और अक्टूबर 2019 के संशोधनों के बाद तीन–चार महीनों में अस्थायी गिरावट के बावजूद, राजस्व में बाद में 5–6% मासिक वृद्धि दर्ज की गई थी।
एसबीआई का अनुमान है कि यह सुधार सालाना एक लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी में बदल सकता है।
मौजूदा जीएसटी आंकड़े उत्साहजनक
वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2025 में जीएसटी संग्रह 4.6% बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 1.87 लाख करोड़ रुपये था। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच कुल संग्रह में 9% की वृद्धि हुई और यह 13.89 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा।
सेंट्रल जीएसटी, स्टेट जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी — तीनों श्रेणियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि सेस संग्रह में मामूली कमी आई है।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह रुझान जारी रहा तो आने वाले महीनों में केंद्र और राज्य सरकारों का राजस्व आधार और मजबूत होगा। इससे न केवल वित्तीय घाटे में कमी आएगी बल्कि आर्थिक विकास दर (GDP Growth) पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

