जनवाणी ब्यूरो |
गागलहेड़ी: बुड्ढ़ाखेड़ा गांव के जंगल से आठ दिन की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार गुलदार का शावक बीती रात पिंजरे में कैद हो गया। वही गडोला गांव में गुलदार के लिए लगाए गए पिंजरे में अभी तक फरार गुलदार नही आया है। जिसके लिए एक पिंजरा लगाया गया था।
वही वन विभाग जंगल मे तीन ओर पिंजरे लगाने की तैयारी में जुटा हुआ है। मौके पर पहुँची डॉक्टरों की टीम ने शावक का परीक्षण किया तो स्वास्थ्य ठीक पाया गया। अब वन अधिकारियों को उसे जंगल में छुड़वाने के लिए आला अधिकारियों के आदेशों पर रुका हुआ है।
गुलदार के शावक को कैलाशपुर स्थित वन रेंज परिसर में रखा गया है। बता दें कि फतेहपुर थाना क्षेत्र के गांव बुढ्ढाखेड़ा पुंडीर में गत सोमवार को मादा गुलदार और उसके दो शावकों के दिखाई देने के बाद उत्तेजित ग्रामीणों ने लाठी डंडों से हमला कर एक शावक को मौत के घाट उतार दिया था।
इसके बाद वन विभाग की टीम ने मादा गुलदार और बचे शावक को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए थे। मादा गुलदार को अगले दिन कब्जे में आ गई थी लेकिन शावक हत्थे नहीं चढ़ सका था। टीमे लगातार सर्च आपरेशन चला रही थी। गत दिवस सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए थे।
रात 12 बजे शावक पिंजरे में आ गया था। इसके बाद वन कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। इसके बाद उसे पिंजरे सहित वन विभाग की कैलाशपुर रेंज कार्यालय में लाया गया। जहां चिकित्सकों की टीम ने उसका परीक्षण किया जिसमें वह स्वस्थ पाया गया। डीएफओ सामाजिक वानिकी रणविजय सिंह ने बताया कि अफसरों का निर्देश मिलने के बाद शावक को भी जंगल में आजाद छोड़ दिया जाएगा।
वही गडौला गांव के जंगल में दिखाई दिए गुलदार को कोई पता नहीं चल सका है। यहां भी तीन दिन पूर्व गुलदार दिखाई देने के बाद पिंजरा लगाया गया था। हालांकि पिंजरा लगाने के बाद किसी को भी गुलदार फिर से दिखाई नहीं दिया है। वन अधिकारीयो द्वारा गडोला के जंगल में तीन पिंजरे लगाने की तैयारी की जा रही है। वह अधिकारीयो द्वारा यह स्पष्ठ कर दिया गया है कि गडौला के जंगल मे गुलदार के पंजे लगातार दिखाई दे रहे है।

