Friday, March 13, 2026
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चिकित्सकों के अभाव से जूझ रही हस्तिनापुर सीएचसी

  • दो चिकित्सकों पर सीएचसी व चार पीएचसी की जिम्मेदारी
  • इमरजेंसी में नही होता घायलों का उपचार, धूल फांक रही लाखों की अल्ट्रासांउड मशीन

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: सरकार द्वारा लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराए जाने का दावा महाभारत कालीन तीर्थ नगरी हस्तिनापुर के स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। चिकित्सकों की कमी उपकरणों की बदहाली और दवाओं का अभाव रहने से लोगों को चिकित्सकीय सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं, अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी चिकित्सकों की कमी के चलते वीरान है।

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हस्तिनापुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ केंद्र प्रदेश सरकार की चिकित्सा प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर देता है। नगर स्थित सीएचसी में सालों के चिकित्सकों की कमी लेकिन सुध कोई नही ले रहा। सीएचसी पर दुर्घटनाओं और फौजदारी में घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था न होने के चलते उपचार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। सीएचसी में संसाधनों की कमी के चलते लाखों रुपये की लागत से बनी यह इमारत मरीजों को मुंह चिढ़ा रही है। फिलहाल यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।

सीएचसी पर नहीं है कोई भी विशेषज्ञ

सरकार की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर पिछले तीन सालों से विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद तो स्वीकृत कर दिए गए हैं, लेकिन चिकित्सकों का पदस्थापन नहीं होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते रात्रि में होने वाली इमरजेंसी में लोगों को उपचार के लिए अन्य जगहों पर भटकना पड़ता है।

संस्थागत प्रसव भी नहीं होते

संसाधनों के साथ चिकित्सकों की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में तलीफपुर, अलीपुर मोरना, मीवा, बहसूमा के सरकारी अस्पतालों में इस वर्ष संस्थागत प्रसव भी नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में मजबूरी में प्रसूता महिलाओं को दूसरे चिकित्सा संस्थानों में जाना पड़ रहा है। विभाग की ओर से भी कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस देकर इतिश्री कर ली जाती है।

सालों से धूल फांक रही अल्ट्रासाउंड मशीन

कस्बे में स्थित सीएचसी में पिछले 11 साल से अल्ट्रासाउंड की सुविधा नदारद है। स्वास्थ्य विभाग के पास नयी अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट नहीं है।

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जिसके चलते मशीन मशीन कंडम हो चुकी है, रेडियोलॉजिस्ट के न होने के चलते बंद कमरे में यह मशीन धूल फांक रही है। सालों से अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के लिए हजारों मरीजों को दूसरे अस्पतालों या निजी केंद्रों पर जाना पड़ा है। 30 बेड की क्षमता के अस्पताल में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गर्इं।

मरीजों को जांच के नाम पर डॉक्टर थमा देते हैं ‘पर्चा’

सरूरपुर: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भले ही बड़ी बिल्डिंग बनाकर इसे अपग्रेड कर दिया हो गया हो। लेकिन शासन स्तर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत इस सीएचसी पर आज भी संविधान से मरीजों से काफी हद तक दूर है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड जैसी रिपोर्ट के लिए लोगों को सिर्फ धोखा मिलता है। चिकित्सक यहां इलाज कराने आए मरीजों को एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट बाहर कराने के लिए परचा थमा देते हैं। जिससे मुफ्त में सरकारी इलाज कराने आया मरीज अपने आपको ठगा-सा महसूस करता है।

जहां उसका धन की बर्बादी होती है साथ ही कमीशन खोरी और खर्चे के साथ में मरीज पर भारी बोझ पड़ता है। चिकित्सा पद्धति के आधुनिक युग में भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आज तक शासन की ओर से महत्व एक्स-रे मशीन या अल्ट्रासाउंड साउंड जैसी सुविधाएं मयस्सर नही हो पाई है। इमरजेंसी के नाम पर भी यहां महज आॅक्सीजन और फर्स्ट एड के अलावा सिर्फ धक्के मिलते हैं। रात के समय चिकित्सा सुविधाएं एक तरह से मर जाती है। दिन में दो बजे के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एवं अवांछित तत्वों और कुत्तों और आवारा जानवरों का बसेरा बना जाता है।

चिकित्सक भी नदारद रहते हैं। रात के समय अक्सर यहां सीएचसी के गेट बंद करके डिलीवरी कराने वाले मरीज अपने आपको असुरक्षित तक महसूस करते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आॅपरेशन के नाम पर केवल दो टांकों वाली नसबंदी की सुविधा है। इसके अलावा यहां सिजेरियन या नॉर्मल डिलीवरी तक के लिए आॅपरेशन की कोई सुविधा आज तक भी उपलब्ध नहीं है।

आॅक्सीजन प्लांट के लिए यहां केवल आॅक्सीजन की सप्लाई सुचारू है, लेकिन चिकित्सकों का यहां भारी टोटा है। महिला चिकित्सक के नाम पर एकमात्र यहां सोनिया ढाका चिकित्सक तैनात है। बाकी अन्य चिकित्सकों का भी रात के समय में काफी अभाव देखा जा सकता है। मरीज बताते हैं कि रात के समय में चिकित्सकों की जगह आशा और स्वीपर मरीजों का उपचार करते हैं। सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब भी सफेद हाथी बन कर रह गया है।

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