जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। यह याचिकाएं राजद सांसद मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल सहित विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेताओं और नागरिक समाज संगठनों द्वारा दायर की गई हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों से सुनवाई की शुरुआत की। सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग की मसौदा मतदाता सूची में कई गंभीर त्रुटियां हैं — कुछ मामलों में मृत लोगों को जीवित और जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रक्रिया को बिना सुधार के आगे बढ़ाया गया, तो करोड़ों योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं।
चुनाव आयोग ने दी सफाई
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने अदालत में कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में ऐसी खामियां आना स्वाभाविक हैं, और यह एक मसौदा सूची है, जिसे अंतिम सूची से पहले सुधारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी शिकायतों की समीक्षा की जाएगी और गलतियों को ठीक किया जाएगा।
कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगे तथ्य
सुनवाई के दौरान पीठ ने चुनाव आयोग को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में सभी आंकड़ों और तथ्यों के साथ तैयार रहे। इसमें विशेष रूप से यह बताया जाए कि एसआईआर से पहले मतदाताओं की कुल संख्या क्या थी, कितने लोगों को मृत घोषित किया गया, और अब कितने नाम सूची से हटाए गए हैं।
विपक्ष की चिंता: करोड़ों होंगे मताधिकार से वंचित
29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक संवैधानिक संस्था मानते हुए यह कहा था कि यदि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, तो वह तत्काल हस्तक्षेप करेगा। मसौदा सूची 1 अगस्त को प्रकाशित की गई थी, जबकि अंतिम सूची 30 सितंबर को जारी की जानी है। विपक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया जानबूझकर कुछ वर्गों को मताधिकार से वंचित करने की दिशा में की जा रही है।
याचिकाकर्ताओं में कौन-कौन शामिल?
मनोज झा (राजद)
महुआ मोइत्रा (तृणमूल कांग्रेस)
केसी वेणुगोपाल (कांग्रेस)
सुप्रिया सुले (शरद पवार गुट)
डी. राजा (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी)
हरिंदर सिंह मलिक (समाजवादी पार्टी)
अरविंद सावंत (शिवसेना – उद्धव ठाकरे)
सरफराज अहमद (झारखंड मुक्ति मोर्चा)
दीपांकर भट्टाचार्य (सीपीआई–एमएल)
इसके अलावा पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL), एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) जैसे नागरिक समाज संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं।

