जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: नेपाल में ‘जेन जेनरेशन’ (Gen Z) के नेतृत्व में शुरू हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने देशभर में हिंसक रूप ले लिया है। लगातार बढ़ रही अराजकता के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं स्थिति को गंभीर होता देख बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक नेपाल छोड़कर भारत लौटने लगे हैं।
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के पानीटंकी बॉर्डर पर भारतीयों की वापसी का सिलसिला जारी है। नेपाल से लौटे कई लोगों ने मीडिया से कहा, “ऐसा लग रहा है जैसे जान बचाकर लौटे हों। अब सुरक्षित महसूस हो रहा है।”
हालात पर नियंत्रण से बाहर, 20 की मौत, 500 घायल
विरोध प्रदर्शनों के दौरान सिंह दरबार, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, सुप्रीम कोर्ट सहित कई सरकारी इमारतों को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया।
अब तक की झड़पों में 20 से अधिक लोगों की मौत और 500 से ज्यादा के घायल होने की खबर है।
काठमांडो, पोखरा, बीरगंज, बुटवल और अन्य प्रमुख शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
सोशल मीडिया बैन से भड़का आंदोलन
सरकार द्वारा फेसबुक, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन और भी उग्र हो गया।
हालांकि सरकार ने सोमवार रात को यह प्रतिबंध हटा लिया, लेकिन तब तक प्रदर्शन राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश में बदल चुका था।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है और वे सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
भारतीयों के लिए MEA की एडवाइजरी
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नेपाल के हालात को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है:
सतर्क रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें
नेपाल में मौजूद भारतीय घर से बाहर न निकलें
आवश्यक जानकारी के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें
भारत लौट रहे नागरिक
नेपाल से लौटे असम निवासी कोहिला ने कहा, “वहां हड़ताल और हिंसा बेकाबू हो चुकी है। 10-15 दिन तक हालात सामान्य नहीं होंगे। भारत लौटकर ऐसा लग रहा है जैसे जान वापस आ गई।”
पानीटंकी बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और नेपाल से आने वाले नागरिकों की गहन जांच की जा रही है।
क्या है ‘जेन-जी’ आंदोलन?
‘Gen Z’ आंदोलन नेपाल की नई पीढ़ी द्वारा शुरू किया गया एक जन-आंदोलन है, जो देश में:
भ्रष्टाचार का खात्मा
पारदर्शिता की मांग
सोशल मीडिया पर पाबंदी का विरोध
नौकरी और शिक्षा के बेहतर अवसर
जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर आया है। यह आंदोलन किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा है, लेकिन इसे जनता का सीधा आक्रोश माना जा रहा है।
बता दें कि, नेपाल इस समय राजनीतिक अस्थिरता और जनविद्रोह के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री का इस्तीफा आंदोलन को रोक नहीं पाया है।
भारत सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है, बॉर्डर अलर्ट पर है और नेपाल में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा और वापसी की निगरानी की जा रही है।

