- वर्चुअल सुविधा केंद्र के लिये भूमि देंगे राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पश्चिमी यूपी के मेरठ में हाईकोर्ट बैंच की स्थापना की मांग तो अभी तक पूरी नहीं हो सकी, लेकिन भाजपा के राज्यसभा सांसद डा लक्ष्मीकांत बाजपेई के द्वारा 30 नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री एवं कानून मंत्री से मिलकर जो प्रस्ताव प्रत्येक जनपद में वर्चुअल सुविधा केंद्र स्थापित करने की मांग की गई थी। उस पर देश के कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने 9 मार्च को देश के सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को पत्र लिखा और पत्र में लक्ष्मीकांत बाजपेई के द्वारा जो प्रस्ताव वर्चुअल सुवधिा केंद्र के बारे में दिया गया।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान में राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत बाजपेई ने 21 मार्च 2023 को डीएम एवं जिलाजज को पत्र लिखा। जिसमें उन्होने इस पत्र में 30 नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं देश के कानून मंत्री किरेन रीजीजू को सौंपे गये पत्र के संबध में जिक्र किया और बताया कि उन्होने प्रदेश में एक हाईकोर्ट होने के कारण दूरदराज क्षेत्र से जो लोग हाईकोर्ट जाते हैं। उन्हे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होना भी कठिन कार्य है,
उसी के समाधान को लेकर कुछ सुझाव प्रधानमंत्री एवं कानून मंत्री से साझा किये। तमाम आंकड़े प्रत्येक जनपद एवं हाईकोर्ट की दूरी एवं प्रदेश एवं जनपद की जनसंख्या के आंकड़े भी दिये। जिसके बाद कानून मंत्री ने देश की सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को उनके सुझाव पर पत्र लिखा है। इसमें प्रयागराज हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने भी जनपद के सभी जिला जज एवं डीएम को पत्र लिखा है, ताकि यह योजना परवान चढ़ सके।
जिसमें मेरठ में भी पांच काउंटर वाला हाईकोर्ट का वर्चुअल सुविधा केंद्र बनने का सपना जल्द साकार होगा। लक्ष्मीकांत बाजपेई ने कहा है कि डीएम व जिलाजज जिस भूमि का प्रस्ताव बनाकर हाईकोर्ट के इस वर्चुअल सुविधा केंद्र निर्माण के लिये प्रस्ताव बनाकर भेज देंगे। वह भी अपनी सांसद निधि से इस हाईकोर्ट के वर्चुअल केंद्र निर्माण के लिये पूर्ण सहयोग करेंगे।
लक्ष्मीकांत बाजपेई ने बताया कि देश के प्रत्येक जनपद में बनने वाले वर्चुअल सुविधा केंद्र से देश की जनता को काफी लाभ होगा। एक तो लंबी दूरी पर बने हाईकोर्ट में जाने के झंझट से समय एवं किराया भाड़ा आदि से काफी राहत मिलेगी। वहीं वादी एवं ग्वाह आदि को जो हाईकोर्ट में जाना पड़ता है, उसमें भी राहत मिलेगी। विचाराधीन बंदी को भी जनपद से हाईकोर्ट आना जाना नहीं पड़ेगा। इस योजना के अंतर्गत देश में करीब 4400 से ऊपर ई-फाइलिंग कोर्ट बनाने का सरकार का निर्णय जो हुआ है। उसका देश की जनता को फायदा मिलेगा।

