- घरों में घुसा पानी, दर्जनों मकान आए बाढ़ की चपेट में
- हिंडन नदी का जलस्तर बढ़ने से दर्जनभर गांव प्रभावित
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: हिंडन नदी का जल स्तर बढ़ने से पिठलोकर गांव में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। पिठलोकर में दर्जनों मकान बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। हिंडन का पानी दर्जनों मकानों में घर गया है। कई मकान गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं। जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
हिंडन के रौद्र रूप लेने से दर्जनभर गांव प्रभावित हो रहे हैं। हजारों बीघा फसल बर्बाद हो चुकी है। हिंडन का जलस्तर बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार को ग्रामीणों ने कहा कि वह बर्बाद हो चुके हैं। मगर प्रशासन उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है।

हिंडन नंदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार नदी में करीब 11 फीट तक जलस्तर पहुंच चुका है। जिससे पिठलोकर, फरीदपुर, मोमन, पांचली, बपारसी आदि दर्जनभर गांव के जंगल पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। हजारों बीघा खेतों में पानी भर गया है। जिससे खेतों में खड़ी गन्ना, ज्वार, धान, बाजरा, सब्जी की फसल नष्ट हो चुकी है। फसलें पानी मेें पूरी तरह डूब चुकी हैं।
जलस्तर बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार को पिठलोकर गांव में आबादी के अंदर तक हिंडन का पानी पहुंच गया। दर्जनों मकान बाढ़ की चपेट में आ गए। मकानों में पानी भर गया। कई मकान गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं। जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। हिंडन का जलस्तर बढ़ने से दर्जनभर गांव प्रभावित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन कोई सुध लेने को तैयार नहीं है।

जिसके चलते ग्रामीणों में रोष और आक्रोश बना हुआ है। किसान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। बेबस किसान फसल को बर्बाद होते देखने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा है। उधर, सरूरपुर क्षेत्र में भी खादर से लगते जंगल में स्थित कान्हा गोशाला में भारी जलभराव होने के कारण पूरी कान्हा गोशाला पानी-पानी होकर रह गई है। यहां से 100 से अधिक पशुओं को सुरक्षित नगर पंचायत प्रशासन निकालकर हर्रा कस्बे के अंदर एक डेरी के अंदर शिफ्ट किया है।
कुछ दूरी पर स्थित डंपिंग ग्राउंड भी पानी-पानी होकर रह गया है। बिजलीघर के अंदर भी पानी घुस गया है। हालांकि बुधवार देर शाम नगर पंचायत प्रशासन द्वारा बिजलीघर के चारों और गहरी खाई खोदकर जेसीबी से पानी रोकने की कवायद की गई थी, लेकिन इस दौरान पानी फिर भी आने के कारण बिजलीघर की एक तरफ की दीवार गिरकर तहस-नहस हो गई है।
बिजलीघर के अंदर कचरा भरा होने से काफी मुसीबतों में कर्मचारियों का आपूर्ति सुचारू रखनी पड़ रही है। ईंख की खड़ी 10 से 12 फीट की फसल में डूबकर नष्ट हो गई है। बरनावा जाने वाले मार्ग पर कई फीट पानी जमा है। क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि लगभग 50 वर्ष बाद बाढ़ के रौद्र रूप खादर क्षेत्र में देखा गया है। लगभग 50 वर्ष पहले भी इसी तरह हिंडन नदी ने कहर बरपाया था,

लेकिन 50 वर्ष बाद एक बार फिर हिंडन नदी का रौद्र रूप को लेकर सब बेबस नजर आ रहे हैं। एसडीएम जागृति अवस्थी का कहना है कि लगातार प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर किसानों और ग्रामीणों के हुए नुकसान का आकलन करके रिपोर्ट बना रही है। मुआवजे की कवायद की जाएगी और किसानों की समस्याओं को प्रशासन नोट कर रहा है।
घरों तक पहुंचा हिंडन का पानी
पिठलोकर गांव में ग्रामीण कई दिन से चिल्ला रहे थे कि गांव बाढ़ की चपेट में आने वाला है। मगर कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं है। वर्तमान में हालत यह है कि हारुन, इस्लाम, अकरम, रामपाल, गुलबहार आदि दर्जनों ग्रामीणों के मकानों में पानी भर गया है। कई गलियों में जाने के लिए रास्ते नहीं बचा है। मकानों में पानी भरने के कारण पशुओं को बचाना मुश्किल हो रहा है। कई मकान गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं।

