
समय-समय पर शिक्षा में नई नीतियों का समावेश होता रहा है। ‘कोठारी आयोग’ 1962-64), ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (1986), और अब नई शिक्षा नीति (2019-20) आकार ग्रहण कर रही है। बीच में प्रोफेसर यशपाल के तत्वावधान में बहुचर्चित ‘राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2005’ भी आया था। इसके अंतर्गत बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने के लिए करीब एक तिहाई पाठ्यक्रम काम करने का सुझाव था। नई नीतियों के आगमन के साथ पाठ्यक्रम में कुछ परिवर्तन होता है। यह स्वभाविक और आवश्यक प्रक्रिया है।किसी अन्य विषय की पाठ्य पुस्तक के संशोधन में किसी को कोई आपत्ति भी नहीं होती, मगर इतिहास का नम्बर आते ही एक खास विचारधारा के विद्वान तत्काल लामबंद होने लगते हैं।