- भ्रष्ट सरकार अपने काले कारनामों से और कितने निर्दोष नागरिकों की लेगी जान- डॉ0 उमा शंकर पाण्डेय
- महज चंद अभियंताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से नहीं होगा सुधार, अधिकारियों एवं विभागीय मंत्रियों पर भी हो कार्यवाही- कांग्रेस
जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दिल हज़रतगंज में योगी सरकार की नाक के नीचे चल रहे अवैध होटल लेवाना सुइट्स में दुःखद अग्निकांड में 4 लोगों की मौत और 16 लोगों के घायल होने की दर्दनाक दुर्घटना सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह चार सितारा होटल मुख्यमंत्री आवास और उनके कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर स्थित है। यहीं पर राजधानी के तमाम आला अधिकारियों एवं मंत्रियों के आवास हैं। फिर भी होटल लेवाना सुइट्स एलडीए से बगैर नक्शा पास हुए कैसे संचालित हो रहा था? एलडीए द्वारा इस स्थान पर आवासीय नक्शा पास किया गया था फिर वहां पर होटल कैसे बनाने दिया गया? यह होटल पांच वर्षों तक कैसे संचालित होता रहा?
इस पर कार्यवाही किसके कहने पर नहीं की गयी? अग्निशमन विभाग द्वारा एनओसी किसके कहने पर दी गयी? पांच वर्षों तक फायर विभाग उक्त होटल पर कार्यवाही क्यों नहीं कर पाया? बिजली विभाग द्वारा अवैध होटल के लिए बिजली कनेक्शन कैसे स्वीकृत किया गया? होटल में चल रहे बार के लिए बगैर नक्शा पास हुऐ किसने दिलवाया आबकारी विभाग से लाइसेंस? नगर निगम एवं जल विभाग ने किसके कहने पर नहीं की आवश्यक कार्यवाही। उक्त विभागों के मंत्रियों ने क्यों नहीं निभाई अपनी जिम्मेदारी?
कांग्रेस प्रवक्ता डॉ उमा शंकर पाण्डेय ने कहा कि इस दुःखद घटना के पीछे शासन-प्रशासन का आकंठ भ्रष्टाचार है। जिसमें सरकार के तमाम विभाग और मंत्रालय शामिल हैं। इसमें लविप्रा किस मंत्रालय के अधीन आता है यह सर्वविदित है। अग्निशमन एवं ऊर्जा विभाग किस मंत्री के अधीन है यह भी सबको ज्ञात है। जिस तरह का भ्रष्टाचार इस होटल के निर्माण एवं संचालन में किया गया है उससे यह कहा जा सकता है कि यह हादसा नहीं बल्कि गिरोहबंद कत्ल है। इस होटल को तीन तरफ से लोहे की चद्दरों से घेर दिया गया था जिससे यह पूरी तरह लाक्षागृह में बदल गया था।
इसलिए जिन लोगों की जान गई है अगर नियमों एवं मानकों का पालन किया गया होता तो सभी 4 जानें बच जातीं क्योंकि तब यह होटल अस्तित्व में ही नहीं आता।प्रवक्ता डॉ0 उमा शंकर पाण्डेय ने अंत में कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मौके पर पहुंचे फायर विभाग के कर्मचारियों के पास सुरक्षा के उपकरण तक नहीं थे, आवश्यक उपकरण के अभाव में वह अंदर जाने के लिए जूझते रहे। इसमें से कई बहादुर कर्मचारी अपनी जान की भी परवाह न करते हुए लोगों को बचाने का भरसक प्रयास किया। जिसमें सात दमकल कर्मी भी घायल हो गये।
इस घटना से आर्थिक समृद्धि के तमाम बड़े-बड़े दावें करने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चेहरा बेनकाब हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री में नैतिकता है तो घटना की समयबद्ध न्यायिक जांच करायें। जिससे सभी शामिल शासन-प्रशासन के लोगों को सख्त से सख्त सजा मिल सके। उन्होंने मृतकों के परिजनों एवं घायलों को उचित आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

