Sunday, March 22, 2026
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आवास विकास: अब नई सरकार बने तो कुछ बात बढ़े

  • सैकड़ों आवंटी हैं परेशान, नहीं ले पाये अपने मकानों पर कब्जा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चुनावी सरगर्मी क्या बढ़ी आवास विकास के खिलाफ मांगों को लेकर धरने पर बैठे किसानों का मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया है। किसानों के इस मामले के कारण सैकड़ों लोगों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वह इस योजना में अपने मकानों और प्लॉटों पर कब्जा तक नहीं ले पाये हैं।

उधर, अब मार्च माह तक किसानों की मांग भी लटक गई हैं, क्योंकि अधिकारी अब भी चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं और जब तक सरकार नहीं बनती तब तक किसानों की मांगों का समाधान होना भी मुश्किल है। अब किसानों और आवंटियों सभी को नई सरकार बनने का इंतजार है।

बढ़े हुए प्रतिकर और प्लॉटों की मांग के लिये महीनों से आवास विकास के खिलाफ स्कीम 11 के मैदान में धरने पर बैठे किसानों को अब नई सरकार के बनने तक का इंतजार करना होगा। उत्तर प्रदेश की नई सरकार की उनकी मांगों को लेकर कोई निर्णय लेगी, क्योंकि आवास विकास परिषद मेरठ की ओर से उनका मामला कई बार मुख्यालय भेजा गया, लेकिन उस पर कोई नतीजा नहीं निकला। उसके बाद चुनाव आ गये और जिसके बाद यह मामला खिंचता ही चला गया। अब किसान भी अधिकारियों से उम्मीद खो चुके हैं। उन्हें नई सरकार से ही उम्मीद है कि सरकार बने तो उनकी बात आगे बढ़े।

…लेकिन आवंटी कहां जायें

यह योजना वर्ष 2009 में बनी थी। यहां आवास विकास परिषद से लोहिया नगर, घोसीपुर, काजीपुर समेत कई गांवों की जमीन एक्वायर की थी। इस में कुछ गांवों के किसान बढ़े हुए प्रतिकर और प्लॉटों की मांग कर रहे हैं। पिछले कई सालों से उनकी मांगे पूरी नहीं हुई। जिसके चलते किसान यहां छह माह से भी अधिक समय से धरने पर हैं और किसानों ने यहां कोई कार्य नहीं होने दिया।

किसानों ने यहां एक भी आवंटी को कब्जा नहीं लेने दिया। आवास विकास ने यहां हजारों की संख्या में फ्लैट और मकान लोगों को बेचे, लेकिन अभी तक एक भी आवंटी यहां कब्जा नहीं ले पाया है, क्योंकि किसानों ने यहां कब्जा नहीं लेने दिया। आवंटी सुशील कुमार ने बताया कि उनका मकान यहां सेक्टर पांच में हैं और कई बार वह अधिकारियों को कब्जे के लिये कह चुके हैं, लेकिन उनकी मांग नहीं सुनीं गई।

इसके अलावा 300 से अधिक प्लॉटों के रजिस्ट्रेशन हुए, जिसमें अभी तक लॉटरी प्रक्रिया नहीं हो पाई, क्योंकि इसे भी किसानों ने रोक दिया। अब आवंटी परेशान घूम रहे हैं कि वह कहां जायें। सभी को मार्च माह का इंतजार है कि नई सरकार बने तो कुछ बात आगे बढ़े।

मेरठ पब्लिक स्कूल को भी नहीं मिल पाया कब्जा

आवास विकास परिषद की स्कीम 11 योजना अपने बेहद ही खास योजनाओं में से एक है। आवास विकास अब इस पर कार्य कर रहा है। यहां आवास विकास की ओर से चौड़ी सड़कें, पार्क आदि बनाये गये, लेकिन अभी तक भी यहां कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। हालात ये हैं कि यहां मेरठ पब्लिक स्कूल की चेन चालने वाला ग्रुप भी अपनी जमीन पर कब्जा नहीं ले पाया। कारण वही किसानों का विवाद रहा।

यहां मेरठ पब्लिक स्कूल जमीन खरीद चुका है और उसका रुपया भी जमा करा चुका है, लेकिन यहां अभी तक कब्जा नहीं ले पाया। किसान नेता भरत भड़ाना ने कहा कि अब उन्हें सिर्फ नई सरकार का इंतजार है। आगामी 10 मार्च को नतीजे आएंगे, जिसके बाद सरकार बनेगी और हमारी बात आगे बढ़ेगी।

307 प्लॉटों के नहीं हुआ आवंटन

वर्ष 2021 में मई जून माह में आवास विकास परिषद की ओर से स्कीम 11 में 307 प्लॉटों के लिये रजिस्ट्रेशन खोला गया था। इसमें 200 वर्ग मीटर के 150 प्लॉट, 300 वर्ग मीटर के 26 प्लॉट, 264 वर्ग मीटर के 12 प्लॉट, 136 वर्ग मीटर के 18 प्लॉट, 127 वर्ग मीटर 101 प्लॉट थे। इन प्लॉटों को लेने के लिये करीब 2377 आवेदन आये थे। विभाग की ओर से इन प्लॉटों को बेचने के लिये रजिस्ट्रेशन तो खोल दिये थे, लेकिन अभी तक विभाग इनका आवंटन नहीं कर पाया है।

जिस कारण रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोग भी परेशान हैं। आवास विकास परिषद की ओर से कई बार इन प्लॉटों के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आवंटन करने की कोशिश की गई, लेकिन किसानों ने इनका आवंटन नहीं होने दिया और हंगामा खड़ा कर दिया। किसानों के विवाद के चलते तब यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। उसके बाद आवास विकास ने जनवरी माह में इनका आवंटन करने की बात कही थी, लेकिन जनवरी बीत गया और उसके बाद चुनाव आ गये। जिसके चलते कोई कार्य आगे नहीं बढ़ पाया।

अब यहां मतदान भी खत्म हो चुका है और यहां रजिस्ट्रेशन करने वाले परेशान घूम रहे हैं। उन्हें प्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं। इन प्लॉटों को लेने के लिये लोगों ने एक लाख रुपये से अधिक जमा कर रजिस्ट्रेशन कराया था। वह रुपये आवास विकास परिषद के खाते में चले गये। एक साल होने को है आवास विकास उन रुपयों का ब्याज कमा रहा है और लोग अपने प्लॉट लेने के लिये परेशान हैं। लोगों को फार्म भरने के बाद भी प्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं।

फार्म भरने वाले सचिन गौतम और गौरव ने बताया कि उन्होंने भी यहां योजना में फार्म भरा था, लेकिन न तो उन्हें रुपये ही वापस मिले और न ही उन्हें प्लॉट मिल पाये हैं। जबकि वह आवास विकास के चक्कर लगा लगाकर थक चुके हैं, लेकिन उनके कार्य नहीं हो पा रहे हैं।

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