Saturday, December 4, 2021
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Homeसंवादस्कूलों में देशभक्ति का पाठ कितना जरूरी?

स्कूलों में देशभक्ति का पाठ कितना जरूरी?

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 73 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इस बात को लेकर घोषणा की थी कि विद्यार्थियों के मन में देश प्रेम पैदा करने के लिए अगले साल सरकारी स्कूलों में ‘देशभक्ति’ का नया पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। उस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि आम तौर पर हमें अपने देश के प्रति प्रेम की याद तब दिलाई जाती है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच मैच हो या सीमा पर तनाव हो। रोजमर्रा के जीवन में हम अपना देश भूल जाते हैं। इसलिए ‘देशभक्ति’ पाठ्यक्रम की शुरुआत की जा रही है, ताकि प्रत्येक नागरिक अपने देश से सच्चा प्रेम कर सके। इससे बच्चे जब बड़े होंगे और काम करना शुरू करेंगे और किसी समय अगर वह रिश्वत लेंगे तो उन्हें यह जरूर महसूस होना चाहिए कि उन्होंने अपनी ‘भारत माता’ को धोखा दिया है। जब वह यातायात का नियम तोड़ें तो उन्हें लगे कि उन्होंने अपने देश के साथ गलत किया है।

अरविंद केजरीवाल का कहना है कि बच्चों को देश के गौरव के बारे में जरूर पढ़ाया जाना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को उसकी जिम्मेदारी और देश के प्रति कर्तव्यों से अवगत कराना चाहिए। भारत के सामने सैकड़ों समस्याएं हैं। हम गरीब हैं, हमारे किसान आत्महत्या कर रहे हैं। लेकिन ये सारी समस्याएं कौन सुलझाएगा? हमें ही इसके समाधान तलाशने होंगे।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने स्कूली पाठ्यक्रम में देशभक्ति का पाठ्यक्रम शामिल करने के पीछे मुख्य कारणों का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि उनकी नजर में देशभक्ति का मतलब यह है कि हम टैक्स की चोरी न करें, रिश्वत ना लें ना दें। ऐसा करने वाले देशभक्त नहीं हो सकते, उन्होंने कहा कि आम आदमी जिंदगी में इतना ज्यादा मश्गूल हो गया है कि उसके पास देश के बारे में सोचने का वक्त ही नहीं है।

केजरीवाल ने आगे कहा कि हमारी संस्कृति के लिए, हमारे देश के लोगों के लिए प्यार और गर्व महसूस होना चाहिए। हमारी जिम्मेदारी है कि यह सब बच्चों में कूट-कूट कर भरा जाए।

जैसा कि स्कूली शिक्षा में देशभक्ति का पाठ्यक्रम शामिल करने वाली कमेटी से मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि पाठ्यक्रम में ऐसी बातें शामिल हो जिससे आने वाली पीढ़ियों में बेहतर सिविक सेंस विकसित हो सके। वह अच्छे नागरिक बन सकें।

उन्होंने कमेटी को कहा कि देश भक्ति का मतलब यह कि हम रेड लाइन जंप ना करें, हम इधर-उधर कूड़ा ना फेंके। हम अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करें। हमारे व्यवहार में कुछ ऐसी बातें सम्मिलित करना बहुत जरूरी है जिससे कि न केवल हमारे देश बल्कि समूची मानव सभ्यता के कल्याण का भाव निहित हो।

इसके लिए पाठ्यक्रम में कुछ विशेष ज्ञानात्मक, भावात्मक और क्रियात्मक उद्देश्य आधारित गतिविधियों को शामिल किए जाने की जरूरत है। देशभक्ति के अंतर्गत अपने काम के प्रति ईमानदारी का भाव, पर्यावरण संरक्षण का भाव, लोगों में सहिष्णुता का भाव, महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव और चेतना का संचार बहुत जरूरी है।

आजादी के 75 वें वर्ष में दिल्ली सरकार ने बच्चों के अंदर देशभक्ति की भावना पैदा करने के उद्देश्य के साथ 28 सितंबर को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देशभक्ति का पाठ्यक्रम लॉन्च किया। यह पाठ्यक्रम कक्षा छह से लेकर बारहवीं तक के बच्चों को पढ़ाया जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि यह पाठ्यक्रम देश की प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा।

देशभक्ति का मतलब सिर्फ सीमा पर जाकर लड़ना नहीं है, देश के अंदर अगर कोई डॉक्टर बिना फीस लिए जरूरतमंद का इलाज कर दे तो यह भी देशभक्ति ही है। दो साल में कड़ी मेहनत के बाद यह पाठ्यक्रम शुरू हुआ है। उम्मीद है कि हमारे बच्चे इससे सीखेंगे। हम प्राचीन भारतीय परिप्रेक्ष्य में झांकने पर पाएंगे कि जब से मानव सभ्यता का सूर्य उदय हुआ है तभी से भारत अपनी शिक्षा तथा दर्शन के लिए प्रसिद्ध रहा है।

यह सब भारतीय शिक्षा के उद्देश्यों का ही चमत्कार है कि भारतीय संस्कृति ने संसार का सदैव पथ-प्रदर्शन किया और आज भी जीवित है। यह सच्चाई है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली ने दुनिया को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। मानव सभ्यता के कल्याण में भारतीय शिक्षा प्रणाली ने बहुत बड़ा योगदान दिया है।

वर्तमान युग में भी महान दार्शनिक एवं शिक्षा शास्त्री इस बात का प्रयास कर रहे हैं कि मौजूदा भारतीय शिक्षा प्रणाली का ढांचा किस प्रकार से दुरुस्त किया जाए कि यह अपने प्राचीन युग की भांति एक नये युग में पथ-प्रदर्शक का काम करें।

भारत में प्रत्येक युग में शिक्षा के उद्देश्य सामंजस्य स्थापित करने वाले रहे हैं। शिक्षा के उद्देश्यों में पवित्रता और जीवन की सद्भावना, चरित्र का निर्माण, व्यक्तित्व का विकास, नागरिक और सामाजिक कर्तव्यों का विकास, सामाजिक कुशलता, सुख की अनुभूति और संस्कृति का संरक्षण जैसे उद्देश्य भारतीय शिक्षा के महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों में शुमार रहे हैं।

इसी दिशा में दिल्ली सरकार का स्कूली शिक्षा में देशभक्ति का पाठ्यक्रम शामिल करना वाकई बहुत ही सराहनीय कदम है। हम सब आशा करते हैं कि भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम भी उभरकर सामने आएंगे। अब जरूरत इस बात की है कि दिल्ली सरकार की तर्ज पर अन्य राज्य सरकारों को भी अपने स्कूली शिक्षा में देशभक्ति का पाठ्यक्रम शामिल करना चाहिए।

इसके साथ-साथ केंद्र सरकार को भी चाहिए कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सुधार के साथ पाठ्यक्रम में देशभक्ति के पाठ्यक्रम को जोड़े जाने की दिशा में काम करना चाहिए और इसकी अनिवार्यता सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि समूचे देश में स्कूली पाठ्यक्रम में देशभक्ति का पाठ पढ़ाया जाए, तो यह कहा जा सकता है कि भारत का भविष्य बेहद सुनहरा होने वाला है।


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