- सरकार की उपेक्षा का दंश झेल रहे कारोबार से जुड़े लोग
- पहले जीएसटी, फिर नोटबंदी, अब कोरोना काल ने तोड़ दिया उद्योेग-धंधों का दम
जनवाणी संवाददाता |
लावड़: कंबल उद्योेग बबार्दी के कगार पर पहुंचने के बाद दरी एवं पायदान उद्योग की और अपना रुख करने वाले इस उद्योग से जुड़े लोग आज भी मुफलिसी के दौर से गुजर रहे हैं। क्योंकि कंबल की सरकार द्वारा खरीदारी बंद कर दी गई। जिसके बाद कंबल उद्योेग बंद हो गया। इस उद्योग को सब्सिडी भी मिलती थी, लेकिन उद्योेग बंद होने के बाद इस उद्योेग से जुड़े लोग जमीन पर आ गए थे।
हालांकि धीरे-धीरे कंबल उद्योग से जुड़े लोेगों ने मेहनत और मशक्कत की और फिर से दरी एवं पायदान उद्योग को विकसित करने में जुट गए। इस उद्योग को धीरे-धीरे पंख लगते हुए नजर आए, लेकिन पहले जीएसटी, इसके बाद नोट बंदी फिर कोरोना काल ने इस उद्योग से जुड़े लोगों के दम तोड़ दिए। अब सरकार की उपेक्षा का यह कारोबार दंश झेल रहा है। जिसके चलते इस कारोबार से जुड़े लोग मुफलिसी का दंश झेल रहे है।
अगर सरकार का रुख इस उद्योग धंधों क ी और हो जाए तो शायद इस कारोबार में चार चांद लग जाए, लेकिन उद्योेग से जुड़े लोगों को सरकार की उपेक्षा के चलते मुफलिसी से गुजरना पड़ रहा है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में यह उद्योग भी बंदी के कगार पर पहुंच जाएगा।

महानगर से 25 किमी दूरी पर स्थित लावड़ कस्बे को 110 वर्ष पहले अंग्रेजी हुकूमत ने टाउन घोषित किया था। इस कस्बे में बड़ी तादाद में कंबल उद्योग लगा हुआ था। यहां तैयार होने वाले कंबल की खरीदारी खादी ग्राम उद्योग के द्वारा सरकार करती थी, लेकिन कंबल की खरीदारी सरकार ने बंद कर दी।
जिसके बाद यह उद्योग बंद हो गया। इस उद्योेग से लगभग चार हजार परिवार जुड्Þे हुए थे। बर्बादी के कगार पर पहुंचे। परिवार के लोग धीरे-धीरे दरी एवं पायदान उद्योग की और जुड़ गए। यह कारोबार भी विकसित होने लगा, लेकिन इस कारोबार को इसलिए पंख नहीं लग रहे, क्योंकि इसकी खरीदारी सरकार द्वारा नहीं की जा रही है। पहले सरकार कंबल खरीदती थी। जिसके बाद सब्सिडी भी मिलती थी, लेकिन सरकार ने आज तक इसकी खरीदारी नहीं की। जिसके चलते यह उद्योग आज भी विकसित नहीं हो पाया है। अगर सरकार इस पर ध्यान दे तो शायद यह कारोबार विकसित हो जाए।
दरी, पायदान उद्योग से जुड़े हैं 2500 लोग
कस्बे में दरी एवं पायदान उद्योेग से लगभग 2500 लोग जुड़े हुए हैं। यह पायदान पुराने कपड़ों के मैटीरियल से तैयार होता है। यह दरी पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों में सप्लाई की जाती है। दरी 70 रुपये में और पायदान 20 रुपये में बिकता है। पानीपत से इसका कच्चा माल आता है। जिसके बाद इसे तैयार किया जाता है।
सरकार पहल करें तो लग सकते हैं उद्योग को पंख
इस उद्योेग से जुड़े साजिद एवं सईद का कहना है कि अगर सरकार इसकी खरीदारी करे तो निश्चित ही इस कारोबार को पंख लग सकते हैं। सरकार खरीदारी करेगी तो सब्सिडी मिलेगी और जिसके बाद इस उद्योेग से जुड़े लोगों की स्थिति बेहतर हो जाएगी। मुन्ना मुल्ला जी का कहना है कि इस कारोबार को सरकार को आगे आकर मदद करनी चाहिए। जिसके बाद इस कारोबार को पंख लग जाएंगे और इस कारोबार से जुड़े लोेगों की स्थिति भी बदल जाएगी।

