बाबू इतने बेखौफ हैं कि उन्हें ताले के अंदर बंद करना पड़ गया हैं। किसी दफ्तर में भी ऐसा नहीं होता कि बाबुओं को तालों में बंद किया जाता हो। डीएम कार्यालय हो या फिर नगर निगम कहीं भी सरकारी दफ्तर में बाबुओं को ताले में बंद नहीं किया जाता, मगर आरटीओ आॅफिस ऐसा हैं, जहां पर बाबुओं पर विश्वास नहीं है कि वो भ्रष्टाचार नहीं करेंगे। उन्हें ताले में बंद कर दिया गया है। आरटीओ आॅफिस की पूरी तरह से तालाबंदी कर दी गई हैं। खिड़की से ही काम होगा। भीतर तालाबंदी कर दी गई हैं। बेलगाम बाबू को ताले में बंद करने के बाद क्या भ्रष्टाचार बंद हो जाएगा? ऐसा लगता नहीं हैं। क्या इतना भी आरटीओ को विश्वास नहीं अपने बाबुओं पर कि समझाने के बाद भ्रष्टाचार नहीं करेंगे। भ्रष्टाचार रोकने के लिए माइंड वास करने की जरूरत हैं। समझाने की जरूरत हैं, लेकिन तालाबंदी कोई इसका स्थाई हल नहीं हैं। क्या आरटीओ में तालाबंदी करके भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी? यह बड़ा सवाल है।
- एंटी करेप्शन की छापेमारी के बाद कितना बदला आरटीओ कार्यालय
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आरटीओ के क्लर्क की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद दूसरे दिन आरटीओ आॅफिस खाली खाली नजर आया। आॅफिस पूरी तरह से सुनसान था। लोगों की भीड़ नहीं थी। आरटीओ आॅफिस कर्मचारी एक तरह से दहशत में दिखें। कर्मचारी अपनी सीट पर तो थे, मगर साइलेंट मोड में। धीरे-धीरे काम इक्का-दुक्का लोग ही परिवहन से संबंधित मामले लेकर आ रहे थे।
आरटीओ हिमेश तिवारी आॅफिस में मौजूद नहीं थे। उनकी कुर्सी खाली थी। बताया गया कि आरटीओ सरकारी कार्य से बाहर गए हैं, जिसके चलते कुर्सी खाली थी। हालांकि मंगलवार को जब एंटी करप्शन का आरटीओ आॅफिस में छापा लगा, तब आरटीओ हिमेश तिवारी मौजूद थे। आरटीओ आॅफिस में एंटी करप्शन की रेड के बाद कितना बदलाव हुआ?
यह जानने के लिए ‘जनवाणी’ टीम आरटीओ आॅफिस पहुंची। जहां आॅफिस सुनसान था। कोई शोर शराबा कहीं कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। कर्मचारी अपनी सीटों पर बैठकर काम निपटा रहे थे। आरटीओ के अंदर किसी की भी एंट्री नहीं थी। गेट पर ताले बंद थे। लोगों की सुविधा के लिए तमाम खिड़की ओपन थी। खिड़की से ही लोग अपना काम करा रहे थे।

इससे पहले लोगों का आवागमन आरटीओ के अंदर से था, जो पूरी तरह से आज बंद रहा। एआरटीओ (प्रशासन) कुलदीप सिंह का कहना है कि आरटीओ आॅफिस के अंदर कर्मचारियों के अलावा किसी की एंट्री नहीं होगी, जिस व्यक्ति को भी परिवहन से संबंधित समस्या है वो खिड़की पर जाकर समस्या का निस्तारण कराये या फिर अधिकारी से मिलना है तो ही एंट्री होगी। हालांकि खिड़की हर रूम के सामने ओपन कर दी गई है।
समस्या का समाधान खिड़की से ही होगा। अंदर एंट्री किसी की भी प्रतिबंधित कर दी गई है। कहा जा रहा है कि कर्मचारी अपनी विंडो को ओपन रखेंगे। उसी विंडो से सरकारी कागजों का लेन-देन रहेगा। कैमरे भी चालू करा दिये गए हैं। कैमरे में कोई भी गतिविधियां होगी, वो कैद हो जाएगी। अंदर से दलालों का पूरी तरह से प्रवेश वर्जित कर दिया गया है।
मामले में यदि दलाल किसी तरह का दबाव आरटीओ कर्मचारियों पर बनाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। यह सख्त कदम आरटीओ के अधिकारी उठाने जा रहे हैं। क्योंकि सीनियर क्लर्क मुंशीलाल की एंटी करप्शन के द्वारा की गई गिरफ्तारी से आरटीओ की छवि धूमिल हुई है।

क्योंकि भ्रष्टाचार का सीधे आरोप आरटीओ कर्मचारियों पर लगा है। हालांकि शिकायतकर्ता अफजाल ने कहा है कि चार ई-रिक्शा पंजीकरण मुंशीलाल नहीं कर रहे थे, जिसके बदले में 75 सौ रुपये मांगे गए थे। हालांकि एआरटीओ (प्रशासन) कुलदीप सिंह का कहना है कि पंजीकरण का काम सुभाष की सीट पर है।
सुभाष पिछले एक माह से दुर्घटना ग्रस्त हैं और मेडिकल लीव पर है। उनका काम नवीन क्लर्क देख रहे हैं। वहीं, ई-रिक्शा का पंजीकरण भी कर रहे हैं। पिछले दो माह के भीतर एआरटीओ प्रशासन कुलदीप सिंह ने करीब ढाई सौ ई-रिक्शा का चालान किया है।
कहा जा रहा है कि ई-रिक्शा यूनियन का अफजाल अध्यक्ष है, जिसके चलते अफजाल आरटीओ अधिकारियों से कर्मचारियों से खफा हो गए थे। तब से ही इस तरह की शिकायतें अफजाल आरटीओ अधिकारियों के खिलाफ कर रहे हैं।

