- आग पर काबू पाने के लिए दमकल कर्मियों को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत
- नुकसान से परिवार में कोहराम, सूचना पर मौके पर पहुंचे मालिक
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: परतापुर के दिल्ली रोड स्थित जय भगवती टैक्सटाइल में बुधवार की रात भयंकर आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली की पूरी फैक्ट्री को चंद मिनट में आग के गोले में तब्दील हो गयी। आगे की लपटें दूर से ही देखी जा सकती थीं। जो बेहद भयंकर प्रतीत हो रही थीं। वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। सूचना मिलते ही वहां इंस्पेक्टर परतापुर जयकरण सिंह भी पहुंच गए। कुछ ही देर में वहां दमकल के वाहन पहुंचने शुरू हो गए, लेकिन आग इतनी भयंकर थी कि दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में मुश्किलें हो रही थीं।
दरअसल, फैक्ट्री के भीतर आग का इतना तगड़ा तांडव था कि भीतर घुसना असंभव हो रहा था। पाइपों से फेंके जाने वाला पानी बेअसर साबित हो रहा था। बाद में आग पर काबू पाने के लिए फैक्ट्री की दीवारें तोड़ने के लिए बड़ी-बड़ी क्रेनें मंगवाई गर्इं। क्रेन से दीवारों को तोड़ा गया। उसके बाद बाहर फैक्ट्री के भीतर लगी आग पानी फेंका गया, लेकिन दीवारें तोड़ने के बाद भी बात नहीं बन सकी। इसके बाद वहां दमकल के वाहन बड़ी संख्या में बुलाए गए। उसके बाद भी आग पर काबू पाने में रात दो बजे तक भी दमकल के प्रयास चलते रहे। करीब दमकल की 20 गाड़ियां ली थी
कोरोना में मालिक की हो चुकी है मौत
जय भगवती टैक्सटाइल के मालिक महेश गुप्ता की कोरोना काल में संक्रमण के चलते मौत हो चुकी हैं। उनके दो बेटे सचिन व एक अन्य फैक्ट्री संभाल रहे हैं। सचिन भी आज बाहर थे। उन्हें जब जानकारी मिली तो वह मेरठ पहुंचे। जानकारों ने बताया कि भगवती फैक्ट्री एक एक्सपोर्ट फैक्ट्री है।
नहीं रुक रही आग की घटनाएं
इन दिनों शहर में आग की कई घटनाएं हो चुकी हैं। परतापुर क्षेत्र की यदि बात की जाए तो वहां भी कई घटनाएं आग की हो चुकी हैं। इसके अलावा पिछले दिनों माधवपुरम इलाके में भी टैÑक्टर पार्टस बनाने वाले फैक्ट्री में आग की घटना हुई थी। आग लगने की बड़ी घटना पिछले दिनों लोहिया नगर इलाके में हुई है। जहां दो दर्जन से ज्यादा बसें जल गई। कई झोंपड़ियां भी जल गयी थीं। भारी नुकसान हुआ था। इसके अलावा भी करीब दर्जन भर आग की ऐसी घटनाएं हैं जो बड़ी थीं।
बिजली की ट्रेन में लगी थी भयंकर आग और अफसर थे बेबस
मेरठ: माल गाड़ी की एक हिस्से से धुआं उठ रहा था। आग धीरे-धीरे बढ़ रही थी। वहां पुलिस भी मौजूद थी, रेलवे के आला अफसर भी मौजूद थे और आग पर काबू पाने के लिए दमकल के वाहन भी मौजूद थे। आग बुझाने के नाम पर जमा हुए इसने भारी भरकम अमले के बाद भी आग बुझाने के बजाए सभी बेबस खडेÞ थे। उनका बेबस खडेÞ रहना मजबूरी था। दरअसल, जिस माल गाड़ी में धुआं उठ रहा था औश्र धीरे-धीरे आग सुलग रही थी। केवल सुलग ही नहीं रही थी, बढ़ती जा रही थी वो ट्रेन इलेक्ट्रॉनिक थी। आग पर काबू पाने के लिए पहुंचे दमकल के स्टाफ ने जब यह देखा तो उन्होंने अपने उपकरण वापस गाड़ी में रख दिए।

रेलवे के अफसरों ने भी माना कि आग पर काबू पाना तक तक संभव नहीं जब तक कि इस रूट की पूरी इलेक्ट्रिक लाइन बंद नहीं हो जाती। और इलेक्ट्रिक लाइन बंद करना भी कोई आसान काम नहीं था। इसके लिए रेलवे मंत्रालय में अगल से इंजीनियर होते हैं और बताया गया कि उन इंजीनियरों को मेरठ पहुंचने में सुबह तक का भी वक्त लग सकता है। हालांकि प्रयास किया जा रहा है कि वैकल्पिक साधनों की मार्फत वो जल्द से जल्द यहां पहुंचे। क्योंकि आग बुझाने के लिए यदि इलेक्ट्रिक लाइन को बंद करना पड़ा तो बडेÞ स्तर पर रेलवे का संचालन प्रभावित होगा। यह भी बताया गया है कि इस मामले को मंत्रालय के स्तर से अफसर हैंडल कर रहे हैं।

