Sunday, March 22, 2026
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Supreme Court: ‘मन नहीं है’, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सीजेआई पर जूता फेंकने वाले वकील पर नहीं करेंगे कार्रवाई

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने सोमवार को कहा कि वे मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई पर जूता उछालने की कोशिश करने वाले वकील के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने के इच्छुक नहीं हैं। पीठ ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश खुद ही आरोपी वकील के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर चुके हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ‘अदालत में नारेबाजी करने और जूता उछालना यकीनन अदालत की अवमानना है, लेकिन ये संबंधित न्यायाधीश पर निर्भर करता है कि वे कानून के तहत कार्रवाई करते हैं या नहीं।’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा

पीठ ने कहा कि ‘अवमानना का नोटिस जारी करने से उस वकील को चर्चा ही मिलेगी, जिसने मुख्य न्यायाधीश की तरफ जूता उछाला। इससे घटना को बेवजह का तूल मिलेगा।’ पीठ ने कहा कि इस घटना को अपने आप ही खत्म होने देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने यह टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने आरोपी वकील राकेश किशोर के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।

सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा

वहीं, सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए अदालत दिशा-निर्देश जारी करेगी। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से विभिन्न अदालतों में जूता उछालने की घटनाओं का की जानकारी देने को कहा है। इससे पहले 16 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी, दूसरों की गरिमा और सत्यनिष्ठा की कीमत पर नहीं दी जा सकतीं। पीठ ने बेलगाम सोशल मीडिया के खतरे को लेकर भी आगाह किया और कहा कि इस तरह की घटनाएं पैसा कमाने के धंधे से ज्यादा कुछ नहीं हैं।

6 अक्तूबर को हुई थी यह घटना

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई पर जूता उछालने की घटना 6 अक्तूबर को हुई थी। यह घटना उस वक्त हुई, जब सीजेआई एक मामले पर सुनवाई कर रहे थे। सीजेआई की एक टिप्पणी से नाराज होकर कथित तौर पर आरोपी वकील ने इस घटना को अंजाम देने की बात कही। घटना के बाद सीजेआई ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया, लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आरोपी वकील का लाइसेंस रद्द कर दिया। इस मामले की पूरे देश में चर्चा हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना की कड़ी निंदा की और मुख्य न्यायाधीश से इस मुद्दे पर बात भी की थी।

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