- चार दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस नेपकोन में छाती और सांस रोग विशेषज्ञ डा. वीरोत्तम तोमर ने दी अहम् जानकारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: वाराणसी में छाती व सांस रोग से संबंधित बीमारियों के लिए आयोजित चार दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस नेपकोन के दूसरे दिन देशभर से पधारे हजारों चेस्ट स्पेशलिस्ट के मध्य मेरठ के छाती व सांस रोग विशेषज्ञ डा. वीरोत्तम तोमर ने अपने व्याख्यान में शुगर की बीमारी से फेफड़ों में पैदा हो रही सिकुड़न या फाइब्रोसिस बीमारी पर गंभीर जानकारी देते हुए बताया कि अधिकतर शुगर के कारण मरीजों को आंख, हृदय रोग, नसों की बीमारी तथा गुर्दा रोग होने की तो जानकारी रहती है, परंतु फेफड़ों की सिकुड़न पर ध्यान नहीं दिया जाता।
यदि शुगर के मरीज को सूखी खांसी व सांस फूलने लगी है तो इसको अधिकतर हृदय या गुर्दा रोग का कारण मान लिया जाता है, परंतु हमेशा ऐसा नहीं है, फेफड़ों में सिकुड़न या फाइब्रोसिस भी इसका कारण हो सकता है। यह पहलू अभी तक अछूता रहा है। डा. तोमर ने इस संबंध में बताया कि शुगर के फेफड़ों पर हो रहे दुष्परिणामों को पकड़ने का सबसे सस्ता व आसान तरीका है कि रोगी को छह मिनट घूमने के पश्चात पल्स आॅक्सीमीटर द्वारा आॅक्सीजन चेक करने पर यदि यह मानक से कम होती है तो यह फेफड़ों की सिकुड़न को इंगित करता है तथा प्रारंभिक अवस्था में इसको पकड़ा जा सकता है।
जिससे समय पर इलाज संभव हो पाता है। देर होने पर फेफड़े स्थायी रूप से सिकुड़ जाते हैं व मरीज आॅक्सीजन पर निर्भर हो जाता है तथा आयु भी कम हो जाती है। फेफड़ों की सिकुड़न को कुछ अन्य जांचों जैसे छाती का एक्सरे, पीएफटी व हाई रेजोल्यूशन सीटी स्कैन के माध्यम से सटीक रूप से पकड़ा जा सकता है। उन्होंने शुगर को नियंत्रण में रखने को प्राथमिकता देते हुए उचित खानपान, प्रतिदिन व्यायाम व योग की महत्वता पर बल दिया। कांफ्रेंस में डा. तोमर ने सांस की नलियों में कैंसर के कारण आयी गांठों को लेजर व इलक्ट्रोकोटरी के माध्यम से कैसे ठीक किया जाए पर भी व्याख्यान दिया। डा. तोमर को वाराणसी में मिले सम्मान पर चिकित्सकों ने बधाई दी।

