कैंट अफसर ही नहीं बोर्ड के सदस्यों की भूमिका भी है संदिग्ध
टोल हो या अवैध निर्माण कहीं भी कोई नहीं की जा रही है सुनवाई
तमाम साक्ष्य मौजूद, फिर भी किस के प्रेशर में नहीं की जा रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
अवैध निर्माणों पर जिस प्रकार से कार्रवाई नहीं की जा रही है तो यह मान लिया जाए कि भूमाफियाओं ने कैंट बोर्ड के अफसर भूमाफियाओं व अवैध निर्माण करने वालों की जेब में रहते हैं। वहीं दूसरी ओर सदर के जौली स्टोर सरीखे अवैध निर्माण के गंभीर मामलों पर कार्रवाई न किए जाने से अब सेना के उन अफसरों पर भी सवाल उठ रहे हैं जिनको कैंट बोर्ड का प्रशासनिक सर्वेसर्वा माना जाता है। लोग पूछ रहे हैं कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई न किए जाने से क्या सेना की वर्दी को दागदार नहीं किया जा रहा है। पूरे छावनी इलाके में अवैध निर्माणों की बाढ़ है और कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। बोर्ड के अफसर हों या सदस्य भ्रष्टाचार की इस गंगोत्री में सभी गोते खाते नजर आते हैं।
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कैंट बोर्ड से चंद कदम की दूरी पर सदर स्थित आवासीय भवन संख्या 196/197 में स्थित व्यवसायिक प्रतिष्ठान जौली शॉपिंग में अवैध निर्माण ब्रिगेडियर अर्जुन सिंह व सीईओ नावेन्द्र नाथ सरीखे बडे अफसरों को नजर नहीं आना बाकई हैरानी भरा है। अवैध निर्माण के इस मामले में जिस प्रकार से लीपापोती की जा रही है उससे लोग अब सेना की प्रतिष्ठा पर ही नहीं बल्कि कह रहे हैं कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई न कर के वर्दी को नहीं दागदार कर रहे हैं।
अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कैंट बोर्ड की जो धमक थी वो अब नजर नहीं आती। इन दिनों तो ऐसा लगता ही नहीं कि कैंट बोर्ड कोई सरकारी संस्थान है। जिस अवैध निर्माण पर अफसरों की चुप्पी को लेकर पूरे छावनी क्षेत्र में जबरदस्त चर्चा का बाजार गरम है वो ब्रिगेडियर व सीईओ सरीखे दोनों बडे अफसरों को नजर नहीं आना और उस पर बुल्डोजर नहीं चलना तो फिर सवाल तो पूछे जाएंगे ही।
लोगों की ओर से दोनों अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खडेÞ किए जा रहे हैं। हालांकि ब्रिगेडियर व सीईओ कैंट अभी छावनी परिषद के लिए दोनों ही नए हैं। लेकिन छावनी के मुख्य बाजार सदर स्थित जिस जौली स्टोर के अवैध निर्माण की यहां बात की जा रही है वो भी पुराना नहीं।
अवैध निर्माण लॉकडाउन में शुरू किया गया था और आन लॉक में भी जारी रहा। रात के अंधेरे में नहीं बल्कि दिन के उजाले में किया गया अवैध निर्माण भी यदि नजर नहीं आ रहा है तो ब्रिगेडियर व सीईओ सरीखे दोनों ही बडे अफसरों के काम करने के तरीके से सवाल लाजमी है। हैरानी की बात तो यह है कि इस अवैध निर्माण की शिकायत रक्षा मंत्री व महानिदेशक रक्षा तक की जा चुकी है, उसके बाद भी यदि कैंट बोर्ड अध्यक्ष व नवागत सीईओ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं तो फिर सवाल तो पूछे ही जाएंगे।
आरोपों पर सफाई के नाम पर परोसा जा रहा झूठ
अवैध निर्माण को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर सफाई के नाम पर केवल झूठ परोसा जा रहा है। इस पर पर्दा डालने के लिए जो अवैध निर्माण कराया गया है उस पर व्हाइट वॉश करा दिया गया है ताकि यदि कोई पूछने आए तो उसको पुराना दर्शाया जा सके। हालांकि व्हाइट वॉश भी चींख-चींख कर कह रहा है कि कुछ दिन पूर्व ही बाहरी दीवारों की पुताई करायी गयी है।
नहीं निभाई जिम्मेदारी
इसे सेटिंग गेटिंग कहेंगे या छावनी क्षेत्र में अवैध निमार्णों पर पर्दा डालने के लिए स्टाफ की नई रणनीति। पूरे कैंट क्षेत्र में यदि कहीं भी कोई अवैध निर्माण होता है तो उसकी पहली सूचना देने की जिम्मेदारी सेनेट्री सेक्शन की है। सेनेट्री सेक्शन इंजीनियरिंग सेक्शन को रिपोर्ट करता है।
इस रिपोर्ट पर इंजीनियरिंग सेक्शन एक और रिपोर्ट तैयार करता है। वो रिपोर्ट सीधी सीईओ कैंट के सामने पेश की जाती है। सेनेट्री व इंजीनियरिंग सेक्शन की रिपोर्ट पर सीईओ सीधे पीपीई एक्ट के तहत आदेश देते हैं। लेकिन स्टाफ की नई स्टे्रटेजिक के चलते जौली के अवैध निर्माण पर पर्दा डालने के लिए किसी भी सैक्शन ने अपना काम सही से नहीं किया जिसके चलते अवैध निर्माण बिना किसी रोक टोक के चलता रहा। और देखते ही देखते भीतर भव्य निर्माण कर डाला।
अवैध निर्माण कितना बड़ा हुआ है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें दो दुकानों वैरायटी स्टोर व कपूर फोटो के अलावा आवासीय भवन संख्या 327 को भी मर्ज कर लिया गया है। स्टोर को सदर बाजार में ही काली माई मंदिर से आगे शिफ्ट होने को मजबूर कर दिया गया।
मालिकाना हक जांच के दायरे में
सदर स्थित आवासीय भवन संख्या 196/197 में जौली स्टोर के संचालकों का मालिकाना हक भी जांच के दायरे में आ सकता है। इसको लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। दरअसल जिस भवन या संपत्ति के अवैध निर्माण का यहां जिक्र किया जा रहा है कैंट बोर्ड के जीएलआर में यह संपत्ति देश के मशहूर हॉकी खिलाड़ी गुलशन राय के नाम दर्ज है।
यह भी पता चला है कि गुलशन राय अविवाहित थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। जब उनकी कोई संतान नहीं थी फिर किससे इस संपत्ति का मालिकाना हक ले लिया गया। चर्चा है कि गुलशन राय के निधन के बाद खुद को उनका करीबी बताकर दर्जनों लोग बतौर संपत्ति के बारिस के रूप में सामने आ गए।
यह तो जौली स्टोर के संचालक ही बात सकते हैं कि इस संपत्ति को कौन से वारिस से उन्होंने क्रय किया है। जनवाणी इसको लेकर किसी पर आरोप नहीं लगा रहा है, लेकिन सदर में जो लोग परिवार पुश्तैनी हैं वो जरूर सवाल पूछ रहे हैं कि गुलशन राय के जब कोई संतान ही नहीं थी तो उनके किस वारिस से मकान का बैनामा कराया गया है। यूं कहने को गुलशन राय के दर्जनों लोग खुद को वारिस बताते हैं।
ब्रिगेडियर व सीईओ की कैसी चुप्पी ?
अवैध निर्माण को लेकर स्टाफ ने डयूटी नहीं की। यह बात समझ में आ सकती है, लेकिन कैंट बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर व सीईओ सरीखे बडे अफसरों का इतने गंभीर मामले में कार्रवाई न करना और भी गंभीर है। अवैध निर्माण पर कार्रवाई के बजाए स्टाफ की चुप्पी तो समझी जा सकती है लेकिन कैंट के ब्रिगेडियर व सीईओ सरीखे दोनों बडे व जिम्मेदार अफसरों ने क्यों चुप्पी साध ली है, यह समझ से परे है। चर्चाएं भले ही कुछ भी हों लेकिन कम से कम ऐसे मामलों पर कार्रवाई न किए जाना तमाम गंभीर सवाल दोनों अफसरों को लेकर उठ रहे हैं।
उधर, जौली शांपिंग सैंटर के अवैध निर्माण पर कार्रवाई के सवाल के लिए कैंट बोर्ड के प्रवक्ता जयपाल तोमर के सीयूजी नंबर पर काल की गयी तो उन्होंने काल रिसीव नहीं की। कैंट बोर्ड प्रशासन के प्रवक्ता का इस मामले में चुप्पी साध लेना बड़े अफसरों की भूमिका को और भी रहस्मयी बना देता है। अगले दिन उस खबर पर मेरठ छावनी के ब्रिगेडियर व सीईओ सरीखे बडे अफसरों द्वारा किस के प्रेशर में कार्रवाई नहीं किए जाने के बारे में पूछना होगा। बहरहाल कुछ भी हो अवैध निर्माणों को लेकर अफसरों की भूमिका सवालों के घेरे में है।
तत्काल सील व ध्वस्तीकरण
जौली स्टोर के अवैध निर्माण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चैंज आफ परपज, सब डिविजन आफ साइट और रही सही कसर अवैध निर्माण ने पूरी कर दी। मरम्मत के नाम पर किए गए भव्य अवैध निर्माण की गंभीरता को इसी बाते से समझा जा सकता है कि बगैर किसी देरी के इसको सील लगाकर निर्माण किए गए हिस्से को बुल्डोजर भेजकर ध्वस्त कराया जाना चाहिए था।
इसके अलावा आरोपी के खिलाफ एफआईआर भी की जानी चाहिए। यह क्यों नहीं किया गया इसका उत्तर तो कैंट बोर्ड के प्रशासनिक मुखिया ब्रिगेडियर अर्जुन सिंह ही दे सकते हैं। इस संबंध में जनवाणी से ब्रिगेडियर अर्जुन सिंह से संपर्क का काफी प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी। सीईओ नावेन्द्र नाथ के सीयूजी नंबर पर भी ट्राई किया लेकिन काल रिसीव नहीं की जा सकी। कहा जा रहा है कि मकान नंबर 327 को डरा धमका कर खाली करा दिया गया।

