
कॉमन सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता फिर से चर्चा में है। बीते 14 जून को विधि आयोग ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण पहल की है। 22वें विधि आयोग ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता पर जनता और मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों के विचार मांगे हैं। भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों से जुड़े अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि ‘राज्य भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।’ 1985 में चर्चित शाह बानो मामले में शीर्ष अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 44 एक ‘मृत पत्र’ के समान बताया और एक समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर जोर दिया था।