जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: महाराष्ट्र में गिलियन बैरे सिंड्रोम से खतरा बढ़ता ही जा रहा है। बताया जा रहा है कि, जीबीएस एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इस संक्रमण का कहर सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में बताया गया है,जहां पुणे में इसके सबसे ज्यादा मरीज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा है कि, पुणे में गिलिय बैरे सिंड्रोम से प्रभावित रोगियों की संख्या 149 हो गई है। वहीं बीते दिन एक व्यक्ति की भी मौत हो गई है।
दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र के बाद पश्चिम बंगाल और राजस्थान में भी जीबीएस के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा अब तेलंगाना में भी एक महिला में जीबीएस के संभावित लक्षण दिखने के बाद उसे हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं, देश के कई राज्यों में बढ़ते इस बीमारी के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को अलर्ट किया है।
ये लोग हो रहे हैं इसका शिकार
गिलियन बैरे सिंड्रोम अपनी गंभीरता के कारण सेहत के लिए चिंता का कारण रहा है। इससे प्रभावित अधिकतर मरीजों को आईसीयू और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है। बहुत कम समय में ही ये बीमारी देश के कई राज्यों में बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना में सामने आए मरीज को भी वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। वहीं, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस रोग का शिकार पाए जा रहे हैं, जिसको लेकर अलर्ट किया गया है।
इस सिंड्रोम के कारण गंभीर समस्याओं का भी खतरा
- बताया जा रहा है कि, गिलियन बैरे सिंड्रोम एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से पेरिफेरल नर्व्स (परिधीय तंत्रिकाओं) पर अटैक कर देती है, जिसके कारणकमजोरी, अंगों में झुनझुनी और गंभीर मामलों में लकवा जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
- जीबीएस के कारण होने वाली गंभीर स्थिति में आपको लकवा मारने और सांस लेने में समस्या हो सकती है।
- सांस की दिक्कत वाले मरीजों को आईसीयू या वेंटिलेटर पर रखने की भी जरूरत होती है ताकि शरीर में ऑक्सीजन के
- संचार में कोई दिक्कत न आने पाए। इसके अलावा कुछ अन्य लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहें।
- अगर आपको हाथ और पैर की उंगलियों, टखनों या कलाई में सुई चुभने जैसा एहसास हो रहा है, सांस की दिक्कत हो या किसी अंग में असामान्य रूप से कमजोरी महसूस हो रही हो तो इसे बिल्कुल अनदेखा न करें।
किन चीजों से रखें दूरी?
- एक्सपर्ट्स के अनुसार, कई स्थानों पर दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया के कारण भी इस रोग के ट्रिगर होने का खतरा देखा गया है। इन जोखिमों को ध्यान में रखते हुए दूषित भोजन और पानी के सेवन से बचा जाना चाहिए। बाहर की चीजों को खाने-पीने से बचना चाहिए। कहीं बाहर जा रहे हैं तो घर से ही पानी की बोतल लेकर जाएं।
- इसके अलावा सबसे खास बात अगर आपको जीबीएस के कोई भी लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जितनी जल्दी इस बीमारी का इलाज होगा, रोगी के ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक हो सकती है।
बचने के लिए क्या करें उपाय?
- स्वच्छता बनाए रखें: नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें, खासकर खाने से पहले और किसी बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद।
- बाहर कुछ भी खाने-पीने से बचे ताकि बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा कम हो सके।
- मौसम बदलने पर खुद का ख्याल रखें ताकि वायरल इंफेक्शन से पीड़ित ना हों क्योंकि ये बीमारी वायरल इंफेक्शन के बाद भी फैल सकती है।
- पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें, जिससे आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनी रहे।
- नियमित व्यायाम से आपके शरीर की ताकत और तंत्रिका तंत्र का स्वास्थ्य बेहतर होता है।।
- अच्छी नींद लेने से शरीर की रक्षा प्रणालीबेहतर काम करती है, जो संक्रमण से बचाव में मदद करती है।
- अगर आपको शरीर में कमजोरी, सुन्नपन या झनझनाहट महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सकता है।

