Monday, March 30, 2026
- Advertisement -

पढ़िए, दुनिया में पीएम मोदी के बढ़ते कदम से कैसे घबराया अमेरिका ?

जेनेवा में शुरू होने वाले डब्ल्यूटीओ की बैठक से पहले 28 अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति जो बाइडन को पत्र लिखकर भारत के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में मुकदमा करने की मांग की थी। इन सांसदों ने भारत सरकार पर किसानों को तय नियम से ज्यादा सब्सिडी देने का आरोप लगाया था। अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में लिखा था कि भारत सरकार डब्ल्यूटीओ के तय नियम के मुताबिक अनाजों को उत्पादन मूल्य पर 10 प्रतिशत से ज्यादा सब्सिडी दे रही है। इससे वैश्विक बाजार में कम कीमत पर भारत का अनाज आसानी से उप्लब्ध हो जा रहा है। ये अमेरिकी किसानों के हित में नहीं है।

डिजिटल डेस्क |

नई दिल्ली: वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूटीओ की बैठक जेनेवा में हुई बैठक के दौरान अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भारतीय किसानों को दी जाने वाली एग्रीकल्चरल सब्सिडी का विरोध किया है। पीएम नरेंद्र मोदी किसानों को सालाना जो 6 हजार रुपए देते हैं, यह भी एग्रीकल्चरल सब्सिडी में शामिल है। ऐसे में इसे रोकने के लिए अमेरिका और यूरोप ने पूरी ताकत झोंक दी है। भारत ने भी इस मुद्दे पर ताकतवर देशों के आगे झुकने से इनकार कर दिया है।

डब्ल्यूटीओ में हुई बैठक                                                                  

12 जून से 15 जून 2022 तक जेनेवा में डब्ल्यूटीओ की बैठक हुई। 164 सदस्य देशों वाले डब्ल्यूटीओ के G-33 ग्रुप के 47 देशों के मंत्रियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल शामिल हुए। इस साल होने वाली डब्ल्यूटीओ की बैठक में इन 3 अहम मुद्दों पर प्रस्ताव लाने की तैयारी की गई है।

33 15

  • कृषि सब्सिडी को खत्म करने के लिए।
  • मछली पकड़ने पर अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने के लिए।
  • कोविड वैक्सीन पेटेंट पर नए नियम लाने के लिए।

अमेरिका, यूरोप और दूसरे ताकतवर देश इन तीनों ही मुद्दों पर लाए जाने वाले प्रस्ताव के समर्थन में थे, जबकि भारत ने इन तीनों ही प्रस्ताव पर ताकतवर देशों का जमकर विरोध किया। भारत ने ताकतवर देशों के दबाव के बावजूद एग्रीकल्चरल सब्सिडी को खत्म करने से इनकार कर दिया है। अब इस मामले में भारत को डब्ल्यूटीओ के 80 देशों का साथ मिला है।

अमेरिका के अनाज की बिक्री घटी, इसलिए भारत का विरोध                    

एग्रीकल्चरल सब्सिडी: अमेरिका और यूरोप चाहते हैं कि भारत अपने यहां किसानों को दी जाने वाली हर तरह की एग्रीकल्चरल सब्सिडी को खत्म करे।

अमेरिका जैसे ताकतवर देशों का मानना है कि सब्सिडी की वजह से भारतीय किसान चावल और गेहूं का भरपूर उत्पादन करते हैं। इसकी वजह से भारत का अनाज दुनिया भर के बाजार में कम कीमत में मिल जाता है।

अमेरिका और यूरोपीय देशों के अनाज की कीमत ज्यादा होने की वजह से विकासशील देशों में इसकी बिक्री कम होती है। यही वजह है कि दुनिया के अनाज बाजार में दबदबा कायम करने के लिए ताकतवर देश भारत को एग्रीकल्चरल सब्सिडी देने से रोकना चाहते हैं। भारत इसे मानने के लिए तैयार नहीं है।

मछली पालन: ताकतवर देशों का मानना है कि भारत जैसे विकासशील देश सरकारी मदद के दम पर ज्यादा मछली उत्पादन करते हैं। इससे ग्लोबल मार्केट में दूसरे देशों को कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि अमेरिका जैसे देश मछुआरों को सब्सिडी दिए जाने से रोकना चाहते हैं। साथ ही मछली पकड़ने पर अंतरराष्ट्रीय कानून भी बनाना चाहते हैं।

भारत ने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इसके पीछे भारत का तर्क यह है कि ऐसा हुआ तो भारत के 10 राज्यों के 40 लाख मछुआरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा।

34 15

सबसे ज्यादा सब्सिडी पाने वाले पंजाब के किसान सबसे ज्यादा संपन्न

भारत के किसानों को सरकारी मदद या सब्सिडी की कितनी जरूरत है, इसे पंजाब के उदाहरण से समझ सकते हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक एक औसत भारतीय किसान परिवार की सालाना आय 77,124 रुपए है। जबकि पंजाब के किसान परिवार की औसत सालाना आय 2,16,708 रुपए है। पंजाब के किसानों की मजबूत आर्थिक स्थिति इस बात का प्रतीक है कि सरकारी मदद कितनी मददगार हो सकती है।

यही वजह है कि भारत सरकार देश के किसानों को बीज से लेकर पानी और बिजली तक पर सब्सिडी देती है। खेती में बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों की आय बढ़ाने के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस यानी एमएसपी और बिजली, उर्वरक पर मिलने वाली सब्सिडी ही एक तरीका नजर आता है।

डब्ल्यूटीओ में भले ही अमेरिका और दूसरे ताकतवर देश विकासशील देशों के किसानों को सब्सिडी देने से मना करते हों, लेकिन खुद अमेरिका अपने देश के समृद्ध किसानों को सब्सिडी देने में दूसरे देशों से कहीं आगे है। वो भी तब, जब अमेरिकी किसानों की सालाना आय भारतीय किसानों से 52 गुना ज्यादा है।

35 14

डब्ल्यूटीओ में भारत को चीन के साथ मिला 80 देशों का सपोर्ट

भले ही सीमा विवाद को लेकर एलएसी पर भारत और चीन की सेना आमने-सामने हों, लेकिन डब्ल्यूटीओ में सब्सिडी के खिलाफ पेश प्रस्ताव के मामले में भारत और चीन दोनों साथ आ गए हैं। इस मामले में भारत को डब्ल्यूटीओ के 80 सदस्य देशों का साथ मिल रहा है।

यह पहली बार नहीं है, जब डब्ल्यूटीओ के नियमों के खिलाफ एशिया के दो बड़े देश चीन और भारत साथ आए हैं। इससे पहले 17 जुलाई 2017 को भी दोनों देशों ने मिलकर किसानों के सब्सिडी मामले में पश्चिमी देशों का विरोध किया था। दरअसल, चीन भी अपने किसानों को सालाना 17 लाख रुपए से ज्यादा की सरकारी मदद, यानी सब्सिडी देता है।

अमेरिकी सांसदों ने सब्सिडी देने पर भारत को दी मुकदमा की धमकी

जेनेवा में शुरू होने वाले डब्ल्यूटीओ की बैठक से पहले 28 अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति जो बाइडन को पत्र लिखकर भारत के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में मुकदमा करने की मांग की थी। इन सांसदों ने भारत सरकार पर किसानों को तय नियम से ज्यादा सब्सिडी देने का आरोप लगाया था।

अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में लिखा था कि भारत सरकार डब्ल्यूटीओ के तय नियम के मुताबिक अनाजों को उत्पादन मूल्य पर 10 प्रतिशत से ज्यादा सब्सिडी दे रही है। इससे वैश्विक बाजार में कम कीमत पर भारत का अनाज आसानी से उप्लब्ध हो जा रहा है। ये अमेरिकी किसानों के हित में नहीं है।

यही वजह है कि अमेरिकी सांसदों ने भारत के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग राष्ट्रपति जो बाइडन से की है।
डब्ल्यूटीओ के जी-33 बैठक में कोविड वैक्सीन के पेटेंट को लेकर भी बैठक हुई है। दरअसल, अमेरिका और कई यूरोपीय देशों का मानना है कि कोविड वैक्सीन का पेटेंट होना चाहिए।

इसका मतलब यह हुआ कि जो कंपनी वैक्सीन बनाएगी, उसे बनाने और बेचने का अधिकार सिर्फ उसी के पास हो। दूसरी ओर, भारत जैसे विकासशील देशों का मानना है कि महामारी के दौर में वैक्सीन चाहे जो कंपनी भी बनाए, लेकिन उस तकनीक को हर देश के साथ साझा किया जाना चाहिए। इससे महामारी को रोकने में मदद मिलेगी।

कोविड-19 के खिलाफ दुनिया की 70 प्रतिशत आबादी को पूरी तरह से टीका लगाने के लिए लगभग 1100 करोड़ वैक्सीन खुराक की आवश्यकता है। रिपोर्ट के मुताबिक अब भी 40 प्रतिशत दुनिया की जनसंख्या को वैक्सीन की पहली डोज नहीं लगी है। ऐसे में भारत कोविड वैक्सीन पेटेंट का विरोध कर रहा है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Mahavir Jayanti 2026: कब है महावीर जयंती? जानिए तारीख, महत्व और इतिहास

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

Gold Silver Price: सर्राफा बाजार में गिरावट, सोना ₹1,46,000, चांदी ₹2,27,000 पर फिसली

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव...
spot_imgspot_img