
बेशक बालासोर रेल दुर्घटना देश क्या दुनिया के भीषणतम हादसों में एक है। इतना ही नहीं और याद भी नहीं कि देश में कभी एक साथ तीन रेलें इस तरह टकराई हों? दुर्घटना से जो एक सच सामने आया है, वो बेहद दुखद और चौंकाने वाला है, जिसमें रिजर्व बोगियों के अलावा मौतें जनरल बोगियों में सवारों की भी हुईं। उससे भी बड़ी हमेशा की तरह सच्चाई ये कि यह दुर्घटना स्टेशन पहुंचने से थोड़ा पहले हुई। अप और डाउन दोनों ट्रैक किसी स्टेशन पर पहुंचने से पहले यात्री सुविधाओं की दृष्टि से कई लूप ट्रैक में विभाजित होकर रुकने वाली ट्रेनों को प्लेटफॉर्म तक और माल व नॉन स्टाप गाड़ियों को आगे का सीधा ट्रैक पकड़ाते हैं। यहां आगे जा रही या पीछे से आ रही ट्रेनों की स्थिति और निगरानीमें जरा सी चूक हादसों में बदल जाती है, यही हुआ। यकीनन ट्रेनों के परिचालन के लिए नित नई उन्नत और नवीनतम तकनीक विकसित होती जा रही है। बावजूद इसके हादसे उतने ही गहरे जख्म भी छोड़ जाते हैं।