जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व शैली को लेकर एक बार फिर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने शनिवार को राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है और पार्टी को परिवार की तरह चलाया जा रहा है।
शकील अहमद ने यह दावा भी किया कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में वे शशि थरूर को वोट देना चाहते थे, लेकिन दबाव में आकर उन्हें मल्लिकार्जुन खरगे के पक्ष में मतदान करना पड़ा।
‘कांग्रेस में वही होता है जो राहुल गांधी कहते हैं’
शकील अहमद ने कहा कि कांग्रेस की मौजूदा कार्यशैली लोकतांत्रिक नहीं है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा, “जैसे नेपाल में राजा के मुंह से निकला शब्द ही कानून होता था, वैसे ही कांग्रेस में राहुल गांधी जो कहते हैं, वही अंतिम फैसला बन जाता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी अपने दौर में सभी नेताओं से संवाद बनाए रखती थीं, लेकिन राहुल गांधी पार्टी नेताओं से मिलना-जुलना नहीं रखते।
शकील अहमद के अनुसार, राहुल गांधी केवल चुनिंदा लोगों से ही मिलते हैं और पार्टी में उभरते लोकप्रिय नेताओं से असहज महसूस करते हैं।
अध्यक्ष चुनाव को लेकर भी लगाए आरोप
शकील अहमद ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के दौरान वे शशि थरूर को समर्थन देना चाहते थे, लेकिन राहुल गांधी और सोनिया गांधी के करीबी नेताओं द्वारा मल्लिकार्जुन खरगे के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा, “मैं अपनी मर्जी के खिलाफ जाकर खरगे साहब को वोट देने को मजबूर हुआ, क्योंकि मैं अपना वोट बर्बाद नहीं करना चाहता था।”
शशि थरूर ने प्रतिक्रिया देने से किया इनकार
जब शकील अहमद के बयान पर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर से सवाल किया गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
थरूर ने कहा, “मैं किसी और के बयान पर कुछ नहीं कहना चाहता। अगर शकील साहब ने कुछ कहा है तो वे खुद इस पर बात कर सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि इस तरह के मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया देना जरूरी है।”
पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं शशि थरूर
इसी बीच, यह भी दावा किया जा रहा है कि शशि थरूर इन दिनों पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। वे केरल कांग्रेस की कई बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं।
हाल के महीनों में थरूर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ समेत कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार की सराहना की थी और कई बार मोदी सरकार की नीतियों पर सकारात्मक टिप्पणियां भी की हैं, जिसे लेकर पार्टी के भीतर असहजता देखी गई है।
कांग्रेस के लिए बढ़ती चुनौती
शकील अहमद के इस खुले बयान को कांग्रेस के भीतर गहराते असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। नेतृत्व, आंतरिक लोकतंत्र और स्वतंत्र विचार रखने वाले नेताओं को लेकर उठ रहे सवालों ने पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

