- रसोई गैस और पेट्रो पदार्थों के दाम बढ़ने से गृहणियां हलकान
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: आखिरकार, महंगाई ने फिर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। चुनाव बाद जिस बात का अंदेशा था,वह सच हो गई। पांच राज्यों की चुनाव प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है। इसी के साथ पेट्रोल-डीजल के दाम के साथ-साथ रसोई गैस के दामों में भी वृद्धि हो गई है।

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कंपनियों ने पेट्रोल व डीजल पर 80-80 पैसे प्रति लीटर की बढोत्तरी की है तो रसोई गैस के दाम में 50 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई है। कीमतों में हुई इन वृद्धि के साथ ही आम जन ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं भी देनी शु कर दी है।

कंपनियों ने पेट्रो पदार्थों के साथ रसोई गैस के दामों में भी बढ़ोत्तरी कर दी। हालांकि कामर्शियल सिलेंडर(19 किग्रा) में मामूली राहत देते हुए 8.50 रुपये की कमी जरू र की गई है। लेकिन गृहणियों को सबसे बड़ा झटका रसोई गैस के दाम बढ़ने से लगा है।

बीती 6 अक्टूबर के बाद से रसोई गैस के दाम नहीं बढ़े थे। पहले जो रसोई गैस सिलेंडर करीब 937 रुपये का था वह अब 987 रुपये का हो गया है। इसी के साथ कंपनियों ने छोटा(5 किग्रा) वाले सिलेंडर के दाम में भी 18 रुपये का इजाफा किया है। अब यह सिलेंडर करीब 362 रुपये का हो गया है।

घरेलू (14.2 किलो) – 987. 50 रुपये
कमर्शियल (19 किलो) – 2096 रुपये
छोटा (05 किलो) – 362 .50 रुपये
पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि से हर खाने-पीने की चीजों से लेकर हर वस्तुओं के दामों में बढोत्तरी होगी। कोरोना के बाद से मंहगाई ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। सरकार को चाहिए कि वह पेट्रो पदार्थों के दामों में वृद्धि से पहले हर वर्ग का ध्यान रखे।
जब भी किसी राज्य में चुनाव होते हैं तो ना तो पेट्रोल डीजल के दामों में बढोत्तरी होती है और ना ही रसोई गैस के। सरकार का यह तर्क की पेट्रो पदार्थों के दाम बाजार के हवाले है,गले नहीं उतरता। यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव ज्यादा है तो सरकर को अपने तेल रिजर्व का इस्तेमाल कर आमजन को राहत पहुंचानी चाहिए।
जब-जब रसोई गैस के दामों में वृद्धि होती है। सबसे बड़ी मुश्किल गृहिणियों के सामने पेश आती है। क्योंकि कमाई तो उतनी ही रहती है। हर वृद्धि से रसोई का बजट बिगड़ता है। इसकी पूर्ती के लिए अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ती है। सरकार को चाहिए की वह ऐसे उपायों को बढावा दें की प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम की जा सके।
कंपनियों द्वारा पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि का असर सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा। सरकार पेट्रों पदार्थों पर लगने वाली ड्यूटी को कम करें। इसी के साथ राज्यों की सरकारों को भी पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट को कम करना चाहिए। इस कारण दाम बढ़ने का असर आम जन पर नहीं पड़ेगा। पेट्रो पदार्थों के दामों में वृद्धि का असर आम जन से लेकर व्यापारियों तक पर पड़ता है।
पेट्रों पदार्थों की कीमतों का सबसे ज्यादा प्रभाव ट्रांसपोर्ट उद्योग पर पड़ता है। यदि डीजल मंहगा होगा तो इसका असर सभी चीजों के दामों पर पड़ेगा। अभी हाल ही में सरकार ने थोक डीजल के दामों में 25 रुपये की वृद्धि की थी। अब हाल में की गई वृद्धि से ट्रांसपोर्ट उद्योग को तगड़ा झटका लगेगा। कोरोना के बाद से ट्रांसपोर्ट उद्योग की कमर टुट चुकी है।

