Saturday, March 21, 2026
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ISRO: इसरो का ऐतिहासिक मिशन, 6100 किलो वजनी उपग्रह को 16 मिनट में पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक भेजा

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने इस साल के अपने आखिरी मिशन में सबसे भारी संचार उपग्रह, ब्लू बर्ड ब्लॉक-2, को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह मिशन पूरी तरह से कॉमर्शियल था और अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के 6100 किलोग्राम वजनी उपग्रह को 520 किलोमीटर दूर पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया। केवल 16 मिनट में उपग्रह को सही कक्षा में भेजने में सफलता प्राप्त हुई।

इसरो ने इस मिशन के लिए अपने शक्तिशाली एलवीएम3 रॉकेट का इस्तेमाल किया, जिसे ‘बाहुबली’ रॉकेट के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसकी क्षमता अत्यधिक है। यह इस लॉन्च व्हीकल की छठी उड़ान थी, और वाणिज्यिक मिशनों के लिए तीसरी उड़ान थी।

इसरो ने एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की जब उसने 6100 किलो वजनी संचार उपग्रह को केवल 16 मिनट में पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया। यह लॉन्च आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55 बजे किया गया।

इसरो के अनुसार, रॉकेट द्वारा किए गए लगभग 16 मिनट के सफल प्रक्षेपण के बाद संचार उपग्रह रॉकेट से अलग होकर करीब 520 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित हो गया। यह लॉन्च न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिका की AST स्पेसमोबाइल (AST and Science, LLC) के बीच हुए एक कॉमर्शियल समझौते का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो की सफलता पर खुशी जताई

इसरो की ऐतिहासिक सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने ट्वीट में कहा, “भारत के युवाओं की ताकत से, हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम और भी आधुनिक और प्रभावी बन रहा है। एलवीएम3 ने अपनी हैवी-लिफ्ट क्षमता से शानदार प्रदर्शन किया है, जिससे हम गगनयान जैसे भविष्य के मिशनों के लिए एक मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं, वाणिज्यिक लॉन्च सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं, और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत बना रहे हैं। यह बढ़ी हुई क्षमता और आत्मनिर्भरता आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अहम कदम है।”

इसरो का ये मिशन क्यों खास है?

इस सफल लॉन्चिंग की अहमियत ये है कि इससे कमर्शियल स्पेस सेक्टर में भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो की पकड़ काफी मजबूत होगी। ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह का वजन लगभग 6,100 किलोग्राम है। यह पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होने वाला भारत की धरती से लॉन्च होने वाला सबसे बड़ा और सबसे भारी वाणिज्यिक संचार उपग्रह भी है। भारत अपने एलवीएम3 लॉन्च व्हीकल के जरिए चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वैश्विक स्तर पर सैटेलाइट इंटरनेट मुहैया कराने वाली- वन वेब के सैटेलाइट लॉन्चिंग मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है। वन वेब मिशन में इसरो ने एलवीएम से दो बार में कुल 72 सैटेलाइट्स पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित की थीं।

क्यों खास है लॉन्च की गई सैटेलाइट

ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह एक अगली पीढ़ी (नेक्स्ट जेन) की प्रणाली का हिस्सा है। अगर यह उपग्रह सही कक्षा में स्थापित हो जाता है और कंपनी के परीक्षण सफल होते हैं तो इसके जरिए 4जी और 5जी स्मार्टफोन पर सीधे सेल्युलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिलेगी। उपभोक्ता को किसी अतिरिक्त एंटीना या कस्टमाइज्ड हार्डवेयर की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल सेलफोन को 4जी या 5जी नेटवर्क हासिल करने के लिए मोबाइल टावर की जरूरत होती है, लेकिन इस उपग्रह के सफल होने के बाद टावर का काम खत्म हो सकता है।

इस सैटेलाइट की मदद से दूरस्थ स्थानों जैसे पहाड़ी इलाकों, महासागरों और रेगिस्तानों तक मोबाइल सेवा पहुंच सकेगी और इन क्षेत्रों में 4जी-5जी नेटवर्क सुविधा पहुंचाना आसान हो जाएगा। इतना ही नहीं आपदा की स्थिति में जब टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर तूफान, बाढ़, भूकंप, भूस्खलन या दूसरी प्राकृतिक आपदाओं में तबाह हो जाते हैं, तब भी सैटेलाइट नेटवर्क बेहतर रहता है।

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