Sunday, May 26, 2024
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नंबर प्लेट पर सिर्फ नगर निगम लिखा होना काफी

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  • सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे निगम के जर्जर बिना नंबर प्लेट के वाहन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में यातायात नियमों को ताक पर रखकर नगर निगम द्वारा शहर में दर्जनभर से अधिक वाहन बिना नंबर प्लेट के ही सड़कों पर दौड़ा रखे हैं। जिसमें यह वाहन इतने जर्जर हो चुके हैं कि वह सड़कों में बने गड्ढों में किसी भी समय टूटकर दो हिस्सों में बंट सकते हैं और किसी बड़ी सड़क दुर्घटना के होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

जहां एक तरफ नगर निगम के आलाधिकारियों को दूसरे को वाहनों पर नंबर प्लेट व जर्जर वाहनों को सड़कों पर न चलाने के लिए जागरूकता अभियान चलाकर यातायात नियमों का पालन कराने के लिए जागरूक करना चाहिए, लेकिन वहीं निगम के अधिकारियों द्वारा खुद ही यातायात नियमों को तुड़वाया जा रहा है।

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जहां निगम के अधिकारी इस तरफ से बेपरवाह नजर आ रहे हैं। वहीं, इन वाहनों के प्रति ट्रैफिक विभाग भी आंखें मूंदे बैठा है। शायद ट्रैफिक विभाग को किसी बडेÞ हादसे का इंतजार है। टैÑफिक विभाग द्वारा सड़क हादसों को रोकने के लिए विभिन्न जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। साथ ही नियमों को तोड़ने वालों पर जुर्माना आदि लगाने की कार्रवाई की जाती है।

जैसे-जैसे सड़क हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है। ठीक वैसे-वैसे ट्रैफिक विभाग यातायात नियमों को और कड़ा बना रहा है। जिसमें सबसे ज्यादा फोकस वाहन की नंबर प्लेट एवं चार पहियां वाहन में सीट बेल्ट पर फोकस होता है। वहीं, दूसरी ओर दुपहिया वाहन चालकों पर हेलमेट पर ज्यादा फोकस होता है, लेकिन किसी भी वाहन पर नंबर प्लेट का होना बेहद जरूरी है।

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ताकि यदि कोई सड़क दुर्घटना हो जाये तो वह वाहन पकड़ में आ सके जिससे सड़क दुर्घटना हुई है, लेकिन नगर निगम पर ट्रैफिक विभाग के किसी भी नियम व कानून का कोई असर नहीं हैं। जिसमें कुछ वाहन इतने जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं कि वह किसी भी समय बडेÞ हादसे का सबब बन सकते हैं। वहीं, यदि देखा जाये तो करीब 100 वाहन ऐसे हैं, जिन पर नंबर प्लेट ही नहीं लगी है।

जिसमें शहर का कूड़ा ढोने वाले ई-रिक्शा ठेला व बडेÞ वाहन जोकि बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे हैं। पूर्व में भी शहर में निगम के बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे वाहनों के संबंध में जनवाणी ने समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया, तब एक दो दिन तो बिना नंबर प्लेट के जर्जर वाहन सड़कों पर दिखाई देने बंद हो गए।

लेकिन फिर से दोगुना संख्या में बढ़कर बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर वाहन दौड़ते देखे जा सकते हैं। इन सब पर निगम व यातायात विभाग के अधिकारी पूरी तरह से आंखे मूंदे दिखाई दे रहे हैं। शायद दोनो ही विभागों के अधिकारियों को किसी बडेÞ सड़क हादसे का इंतजार है।

बिना नंबर प्लेट के कैसे होती है डिपो के रजिस्टर में एंट्री

नगर निगम में तीन डिपो हैं, जिसमें दिल्ली रोड डिपो, सूरजकुंड रोड डिपो एवं कंकरखेड़ा डिपो, इन डिपो में करीब 400 से 500 वाहन छोटे बड़े कूड़ा उठाने व सड़कों की साफ-सफाई एवं पानी का सड़कों पर छिड़काव आदि करने के लिए लगे हुए हैं। यदि इन वाहनों पर देखा जाये तो करीब 100 वाहन ऐसे हैं, जोकि जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं।

इतना ही नहीं यदि गहरे गड्ढे में वजन से लदा वाहन चला जाए तो वह दो हिस्सो तक में बंट सकता है। साथ ही इन वाहनों पर नंबर पलेट भी नहीं लगी है, जिसमें डिपो से जब इन वाहनों में डीजल भरवाया जाता है तो रजिस्टर में क्या नंबर दर्शाया जाता है।

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यदि डिपो के रजिस्टर की सही तरह से जांच हो जाये तो आधे से अधिक वाहन ऐसे मिलेंगे जोकि निगम में चल ही नहीं रहे उनके नंबर पर दूसरे वाहन निगम में चल रहे हैं। जिसमें इस तरह के वाहनों में भ्रष्टाचार के तेल का खेल समझ में आ जाता है कि किस स्तर पर तेल का खेल निगम में चल रहा है। कुछ वाहन महीनों तक डिपो से निकलते नहीं ओर उनका डीजल रजिस्टर में बराबर चढ़ता रहता है।

बिना नंबर प्लेट के वाहनों के सड़कों पर दौड़ने का जो मामला बताया जा रहा है। उसकी जांच कराकर संबंधित डिपो प्रभारी को निर्देशित किया जायेगा कि वह बिना नंबर प्लेट के वाहनों को सड़कों पर न चलाएं। -डा. हरपाल सिंह, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम मेरठ

90 वार्डों में एक साथ विकास कार्यों को मिलेंगे करीब 22 करोड़

नगर निगम क्षेत्र में नगर निगम की निधि बोर्ड फंड से शहर में जल्द ही सभी 90 वार्डों में एक साथ विकास कार्य शुरू हो सकेंगे। जिसमें प्रत्येक वार्ड में नाली खडंÞजे के विकास कार्य पर 25-25 लाख रुपये का बजट रखा गया है। जिसमें अधिकतर वार्डों में नाली खड़ंजे आदि का सर्वे का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। जिसमें निगम द्वारा जल्द ही टेंडर छोडेÞ जाने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। जिसमें सभी वार्डों में एक साथ विकास कराने की बात महापौर द्वारा कही गई, ताकि कोई वार्ड विकास से वंचित न रह सके।

नगर निगम में यदि निगम के अधिकारी एवं महापौर और पार्षदों के बीच तालमेल सही चला तो शहर के सभी वार्डों में नाली खड़ंजे आदि का विकास कार्य जल्द ही धरातल पर शुरू होता दिखाई देगा। यदि निगम के अधिकारी एवं पार्षद के बीच किसी निर्माण कार्य को लेकर विवाद है तो इस तरह के वार्डों में विकास कार्य अधर में भी लटक सकता है, लेकिन वार्ड पार्षद एवं निगम के अधिकारियों द्वारा जो निगम की निधि बोर्ड फंड से प्रत्येक वार्ड में 25 लाख रुपये के विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव रख गया।

जिसको बोर्ड द्वारा स्वीकृति भी मिल गई और जिस पर वार्डों में सर्वे का कार्य कराने के बाद अब जल्द ही टेंडर छोडेÞ जाने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। निगम के सभी 90 वार्डों में करीब 22 करोड़ रुपये के विकास कार्य निगम की बोर्ड निधि से कराए जायेंगे। जिसमें नाली खड़ंजे के साथ छोटे मोटे अन्य विकास कार्यों को भी शामिल किया गया है।

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