
16 जुलाई, 1982 को मुंबई में पैदा हुई आमना शरीफ को राजीव खंडेलवाल के अपोजिट ‘कहीं तो होगा’ (2003-2007) की कशिश सिन्हा और ‘कसौटी जिंदगी की 2’ कोमोलिका चौबे बसु के किरदारों के लिए जाना जाता है। आमना शरीफ ने लगभग एक साल तक फिल्म वितरक अमित कपूर के साथ डेटिंग करने के बाद 27 दिसंबर 2013 को शादी की। उनसे उन्हें एक 7 साल का बच्चा भी है जिसका नाम अरैन कपूर है। आमना शरीफ ने अपने फिल्म कैरियर की शुरुआत एक तमिल फिल्म ‘जंक्शन’ (2002) के साथ की थी। बॉलीवुड में उनकी पहली फिल्म ‘आलू चाट’ (2009) थी। उसके बाद वह आफताब शिवदासानी के अपोजिट ‘आओ विश करें’ (2009), ‘शकल पे मत जा’ (2011) और मोहित सूरी की ‘एक विलेन’ (2014) में नजर आ चुकी हैं। इन दिनों आमना शरीफ अपनी नई वेब सीरीज ‘डैमेज्ड 3’ को लेकर काफी चर्चा में हैं।
प्रस्तुत हैं उनके साथ की गई बातचीत के मुख्य अंश:
वेब सिरीज ‘डैमेज्ड 3’ को लेकर आप खासी चर्चा में हैं। इसके बारे में बताइए?
इसमें मेरा किरदार एक करप्ट पुलिस वाली का है। इसके पहले भी मैं ‘एक विलेन’ (2014) और ‘कसौटी जिंदगी की 2’ (2019) में ग्रे किरदार निभा चुकी हूं। इसलिए यह मेरे लिए कोई नया एक्सपीरियेंंस नहीं है लेकिन पता नहीं इस बार इतनी चर्चा क्यों हो रही है।
इस किरदार को आपके लिए ‘लार्जर देन लाइफ’ कहा जा रहा है। आप इसे किस रूप में देखती हैं?
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इस तरह का रोल भी कभी मिलेगा। मुझे लगता है कि एक एक्ट्रेस को इस तरह के किरदार मिलना आश्चर्यजनक है लेकिन ओटीटी के आ जाने के बाद हमारे लिए यह संभव हो सका कि हम अलग-अलग तरह के किरदार निभा सकें। मुझे लगता है कि महिलाओं के लिए ओटीटी प्लेटफार्म बहुत अच्छा है।
आपने कहा कि इस तरह के ग्रे शेड वाले किरदार आप पहले भी निभा चुकी हैं। ऐसे में यह किरदार निभाना आपके लिए कितना आसान या मुश्किल रहा?
मेरे लिए यह बिल्कुल भी आसान नहीं रहा, क्योंकि मैं अपनी रियल लाइफ में रश्मि जैसी कतई नहीं हूं इसलिए मुझे काफी तैयारियां करनी पड़ी। मानसिक रूप से खुद को तैयार कर उस किरदार में घुसना पड़ा। तब कहीं जाकर सब कुछ मुमकिन हो सका। मैंने अपनी निजी जिंदगी में कभी स्मोकिंग नहीं की, किसी को गाली नहीं दी, लेकिन इसके लिए मुझे यही सब कुछ करना पड़ा। इस किरदार को निभाने के पहले मेरी रातों की नींद उड़ गई थी।
‘डैमेज्ड 3’ करने के पहले आप इसके कंटेंट को लेकर कितनी संतुष्ट थीं?
मुझे सीरीज के कंटेंट पर पूरा भरोसा था, क्योंकि मैं जानती थी कि कंटेंट को लेकर दर्शकों की समझ लगातार काफी बढती जा रही है। वो जानते हैं कि अच्छा शो क्या है। इस तरह के शोज में वो खुद को कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में रिलेट कर पाते हैं। आज जिस तरह की सीरीज बन रही हैं, उनमें बिलकुल असल जिंदगी की तरह किरदार होते हैं, यह बात आॅडियंस को काफी अच्छी लग रही है।
‘कहीं तो होगा’ आपका बेहद पॉपुलर शो था लेकिन उसके बाद आप अचानक घर पर बैठ गई थीं। उसकी क्या वजह थी?
मुझे उसी तरह के रोल मिलने शुरू हो गए थे और मैं एक ही तरह के किरदारों में खुद को रिपीट करना नहीं चाहती थी। जब आपके पास आॅफर लगातार आ रहे हों, तब उनके लिए ना कहने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। मैं सही रोल के इंतजार में थी।
छोटे पर्दे की तरह बड़े पर्दे का आपका सफर उतना शानदार साबित नहीं हो सका। टीवी शोज की तरह, आपको फिल्मों में ज्यादा कामयाबी नहीं मिल सकी?
इस बारे में सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगी कि मैं एक नॉन फिल्म बैकग्राउंड से हूं इसलिए जब फिल्में कर रही थी, मुझे गाइड करने वाला कोई नहीं था। ये बताने वाला कोई नहीं था कि मुझे किस तरह के रोल चुनने चाहिए और किस तरह आगे बढ़ना चाहिए। ‘एक विलेन‘ (2014) के बाद मेरे पास काफी आॅफर आने लगे थे लेकिन तब तक मैं मां बन चुकी थी और मैंने अपना ध्यान एक्टिंग से हटाकर अपने बच्चे की परवरिश पर लगा दिया।


