Sunday, February 25, 2024
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जीने की यात्रा

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Amritvani


मनुष्य को अपने जीवन मे भी विभन्न यात्राओं से गुजरना पड़ता है। यह यात्रा शिशु अवस्था से लेकर वृद्धावस्था तक अनवरत चलती रहती है। जिसमें हम अनेक प्रकार के अनुभव प्राप्त करते हैं और उन अनुभवों से अपने वर्तमान से भविष्य की सीढ़ियों पर चढ़ते जाते हैं। कहते हैं कि हर मनुष्य की अपनी यात्रा होती है और वह खुद उस यात्रा का यात्री भी। लेकिन अगर मनुष्य की यात्रा जितने के लिए निरंतर जारी होती है तो सफलता मिलती ही है। एमर्सन कहते है-‘मैं हर कदम पर हारा हूं, पर जन्मा केवल जीत के लिए हूं।’ हम एक आदर्श रास्ते की खोज में दिनोदिन इन्तजार करते रहते हैं कि शायद वह अब मिलेगा, मगर हम भूल जाते हैं कि रास्ते चलने के लिए बनाये जाते हैं, इंतजार के लिए नहीं। हम अपने जीवन में इंतजार के लिए बैठे नहीं रह सकते हैं। इसीलिए राह कितना भी कंटीला हो हमें निरन्तर जीवन पथ पर अग्रसर रहना चाहिए। सफलता की सीढ़ी जीवन की यात्रा से हो कर ही गुजरती है। यह जीवन जो हमें प्रकृति से मिली है उसकी यात्रा का अनुभव हमें आंनद देता है। इस अनुभूति को पाने के दौरान हम कई बार ठोकर लगती है हम सम्भलते हैं और नए जोश के साथ अपनी यात्रा में आगे बढ़ जाते हैं।माना जाता है की यात्रा वही करते हैं जो मुसाफिर होते हैं लेकिन एक इंसान भी तो संसार रूपी माया का मुसाफिरी है एक ऐसा मुसाफिर जिसकी शुरूआत उसकी जन्म से होती है और अंत उसकी मृत्यु से। हमें ईश्वर एक जीवन देता है और उसी में सफल हो कर दुनियां में अपना नाम बनाता होता है और मानवता के लिए कुछ दे कर जाना होता है।                                                                           -पल्लवी सिंह


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