Thursday, March 5, 2026
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एलएलआरएम मेडिकल के जूनियर डाक्टर हड़ताल पर

  • इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाएं और वार्ड इंटर्न्स और नॉन पीजी के कंधों पर
  • रात में प्राचार्य कार्यालय के सामने धरने पर डटे रहे डाक्टर
  • आईएमए का प्रतिनिधि मंडल मिला एसएसपी से और राज्यमंत्री हड़तालियों से मिले

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल इमरजेंसी में मारपीट प्रकरण को लेकर एफआईआर व एसएसीएसटी की धारा लगाए जाने के विरोध में एलएलआरएम मेडिकल के जूनियर रेजिडेंट डाक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। वहीं, दूसरी ओर मेडिकल की इमरजेंसी व जनरल वार्डों में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी अब इंटर्न्स व नॉन पीजी यानि जो अभी डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं

उनके कंधों पर आ गयी है। यदि शीघ्र ही प्रशासन ने हड़ताल समाप्त नहीं करायी तो स्वास्थ्य सेवाओं के चरमराने से इंकार नहीं किया जा सकता। इंटर्न्स व नॉन पीजी के कंधों पर ज्यादा देर तक मेडिकल की स्वास्थ्य सेवाएं चल सकेंगी इसको लेकर संदेह जताया जा रहा है।

प्राचार्य कार्यालय पर धरना

पुलिस कार्रवाई के विरोध में मेडिकल के जूनियर डाक्टरों ने प्राचार्य कार्यालय के सामने मैदान में धरना शुरू कर दिया है। नवंबर की रात में भी तमाम हड़ताली डाक्टर प्राचार्य कक्ष के सामने धरने पर बैठे रहे। उनके साथ बड़ी संख्या में मेडिकल के सीनियर रेजिडेंट डाक्टर भी धरने पर मौजूद हैं। उनका कहना है कि पुलिस एक तरफा कार्रवाई कर रही हैं। इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए मेडिकल प्रशासन को पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से बात करनी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर जांच कमेटी ने अपने रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप दी है।

एसएसपी को दिया ज्ञापन

मेडिकल के डाक्टरों के खिलाफ एफआईआर व एससी-एसटी की धाराएं लगाए जाने के विरोध में सोमवार को आईएमए का एक प्रतिनिधिमंडल एसएसपी रोहित सिंह सजवाण से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में आईएमए के अध्यक्ष डा. संदीप जैन, सेक्रेटरी डा. आलोक अग्रवाल, डा. सुशील गुप्ता, डा. शिशिर जैन, डा. मनीषा त्यागी, डा. ऋषि भाटिया, मेडिकल रेजीडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. तिलक सिंह के अलावा पीड़ित जूनियर डाक्टर अभिषेक भी मौजूद थे।

राज्यमंत्री पहुंचे, एसएसपी की बात

मेडिकल के जूनियर डाक्टरों के धरने पर बैठने की खबर मिलने पर ऊर्जा राज्य मंत्री सोमेन्द्र तोमर मेडिकल पहुंच और धरने पर बैठे जूनियर डाक्टरों से उन्होंने बात की। उन्होंने पूरी घटना की जानकारी ली और फिर वहीं से एसएसपी से मोबाइल पर बात कर एक तरफा कार्रवाई किए जाने का कारण पूछा। उन्होंने कहा कि किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। पुलिस को जूनियर डाक्टरों भी पक्ष जानना चाहिए।

एक तरफा कार्रवाई क्यों ?

आईएमए के प्रतिनिधिमंडल ने एसएसपी से सवाल किया कि इस मामले में मेडिकल पुलिस एक तरफा कार्रवाई क्यों कर रही है। जूनियर डाक्टरों की तहरीर क्यों नहीं ली जा रही है। उन्होंने पूरी घटनाक्रम की जानकारी एसएसपी से कहा कि जब भी कोई मरीज किसी डाक्टर के पास आता है तो उसकी जाति धर्म कभी नहीं पूछी जाती। केवल मरीज को क्या तख्लीफ है, इतना पूछा जाता है। फिर ऐसा क्या कारण है जो एसएसएसटी एक्ट लगा दिया। एसएसपी ने आईएमए को इस मामले में कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

देरी से हो सकता है नुकसान

वहीं, दूसरी ओर विधि विशेषज्ञों की राय में इस मामले में यदि समझौता या फिर जूनियर डाक्टरों का पक्ष नहीं सुनने में देरी होती है तो इससे उन डाक्टरों को कानूनी रूप से नुकसान हो सकता है जिनके खिलाफ पर एफआईआर व एससी-एसटी एक्ट लगाया गया है। इसमें सीधे जेल जाने का प्रावधान है। इसलिए देरी किया जाना नामजद जूनियर डाक्टरों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है।

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