अमित खान आज हिंदी जासूसी उपन्यासों की दुनिया का एक बड़ा नाम है। उनके अभी तक 100 से ज्यादा उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं, जिन्हें देश के बड़े प्रकाशकों ने प्रकाशित किया है। मात्र 12 साल की उम्र में उनकी पहली कहानी प्रकाशित हो गई थी। 80 से ज्यादा लघु कथाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। डायमंड कॉमिक्स भी उन्होंने बड़ी संख्या में लिखे। टेलीविजन पर उनके लिखे कथा, पटकथा, संवादों पर 100 से ज्यादा एपिसोड टेलीकास्ट हो चुके हैं, जिनमें सुराग, हेलो इंस्पेक्टर, होंटिड हाउस, सावधान इंडिया जैसे सुपर-हिटशोज शामिल हैं।
अमित का फिल्मी सफर सनी देओल स्टारर ‘कर्ज’ (द बर्डनआॅफ ट्रुथ) से शुरू हुआ और संजय लीला भंसाली की मराठी फिल्म ‘लाल इश्क’, पंजाबी फिल्म ‘खिड़ोखुंडी’ से होता हुआ अरबाज खान अभिनीत ‘निर्दोष’ तक जा पहुंचा, जिसके वह लेखक भी थे और क्रिएटिव डायरेक्टर भी। और अब उनकी कहानियां पहुंच चुकी हैं, मनोरंजन के सबसे लेटेस्ट प्लेटफॉर्म ओटीटी यानी वेब सीरीज और वेब फिल्म तक। जल्द ही दीपावली पर ‘आॅल्टबालाजी’ (एकता कपूर) लेकर आ रही हैं उनके सुपर-हिट उपन्यास पर आधारित वेबसीरीज ‘बिच्छू का खेल’, जिसमें मुख्य भूमिका में देव्येंदु शर्मा और जीशान कादरी हैं। पेश हैं उनसे बातचीत के अंश…
किताबों के पन्नों से इन्ंरनेट जैसे हाई स्पीड माध्यम तक का सफर कैसा रहा?
-बहुत सुंदर। अच्छा लगता है कि ऊपरवाले ने मुझे लेखक बनाया। दूसरों के मनोभावों को व्यक्त करने की क्षमता और शक्ति मुझे दी। कहने को यह एक फिक्शन वर्ल्ड है, लेकिन मैं जब अपनी लेखनी से किरदार गढ़ने बैठता हूं, तो मुझे मुझे कुछ भी फिक्शन नहीं लगता। कहानियां कहना मुझे बचपन से ही अच्छा लगता है और आज इंटरनेट के इस दौर में तो कहानियों के और भी नए-नए प्लेटफॉर्म खुल गए हैं। मेरे उपन्यासों पर आज बड़ी संख्या में आॅडियोबुक्स भी बन रही हैं। हां, वेब सीरीज पहली है और यह पहला अनुभव बहुत शानदार रहा है और जल्द ही आगे और भी वेब सीरीज और वेब फिल्म प्लान कर रहा हूं।
‘बिच्छू का खेल’ के बारे में कुछ बताइए?
-यह एक जबरदस्त मर्डर मिस्ट्री है। मुझे आज तक याद है, मैंने सबसे पहले एकता (एकता कपूर) को यही कहानी सुनाई थी और कहानी सुनते ही वो फौरन इस पर वेब सीरीज बनाने के लिए तैयार हो गर्इं। इसके बाद मैंने उन्हें कुछ और कहानियां भी सुनार्इं और उन्हें वह भी बहुत अच्छी लगीं। उम्मीद है कि जल्द ही ‘बिच्छू का खेल’ के बाद कुछ और उपन्यासों पर भी मेरी वेब सीरीज आपको देखने के लिए मिलेंगी।
लेखक अमित खान को इस लंबे सफर में अपने आप में क्या बदलाव करने पड़े, ताकि इस ‘मॉडर्न हाई-टेक फास्ट एंटरटेनमेंट फॉर यूथ’ के लिए अपनी कहानियों को परोस सकें?
-कुछ भी बदलाव नहीं करने पड़े। मैं खुद यूथ हूं और मेरे अंदर आज भी 18 साल का एक नौजवान रहता है। जिस दिन वो नौजवान 18 साल से बड़ा हुआ, उस दिन मैं लिखना छोड़ दूंगा। मैं सिर्फ यूथ के लिए लिखता हूं। यूथ मुझे इंस्पायर करता है। शायद इसीलिए 25 साल पहले लिखे गए मेरे उपन्यास पर एकता कपूर ने वेबसीरीज बनाई और आप देखेंगे, तो वह आपको भी आज की ही लगेगी। यही मेरी कहानियों की शक्ति है और खुद मेरी भी।
बड़े पर्दे और इंटरनेट में आपको एज ए राइटर और क्रिएटिव डायरेक्टर क्या कोई फर्क नजर आता है?
-बहुत फर्क है। इंटरनेट आपको अभिव्यक्ति की आजादी देता है। यहां सेंसर नहीं है। लेकिन अभिव्यक्ति की इस आजादी का दुरुपयोग भी हो रहा है। मुझे लगता है कि अभिव्यक्ति पर थोडा अंकुश भी जरूरी है, वरना कुछ कलाकार इस आजादी का दुरुपयोग भी करने लगते हैं। इंटरनेट पर बहुत गलत-गलत चीजें मौजूद हैं, जो हमारे यूथ के लिए, उनके फ्यूचर के लिये अच्छी नहीं हैं।
क्या कहानियों की दुनिया बदल रही है?
-यस, आॅफकोर्स। आर्ट आॅफ स्टोरी टेलिंग बदल रही है और मैं समझता हूं कि आर्ट आॅफ स्टोरी टेलिंग हमेशा बदली है। हमारी सोसाइटी बदलती है, तो आर्ट आॅफ स्टोरी टेलिंग भी अपने आप बदल जाती है। क्योंकि किरदार तो सोसाइटी से ही आते हैं। और हर 10 साल में सोसाइटी में चेंजिस आते ही हैं। लोग अपडेट हो रहे हैं, तो कहानियोंको भी अपडेट होना जरूरी है। जो राइटर वक़्त के साथ अपडेट नहीं होते, वोपिछड जाते हैं।
वेब सीरीज या वेब फिल्म्स में क्या सिर्फ थ्रिलर्स की ही डिमांड है?
-नहीं। अच्छी कहानियों की डिमांड है। अगर अच्छी कहानियां हैं, फिर चाहे वो किसी भी जोनर की हों, वह जरुर बनेंगी। लेकिन उन कहानियों में वो गुणवत्ता होनी बहुत जरूरी है कि वो बाजार में टिकी रहें।
‘बिच्छू का खेल’ के बाद अगली वेब सीरीज कौन सी होगी?
-जल्द ही कुछ नए प्रोजेक्ट की घोषणा होगी। बस इतना ही कहूंगा कि आने वाले समय में आपको मेरी कई फिल्में और वेब सीरीज देखने को मिलेंगी और वह सब अच्छे और बड़े प्रोजेक्ट होंगे,जिनमें अच्छा कंटेंट भी होगा।
-प्रस्तुति : सलीम अख्तर सिद्दीकी


