Sunday, March 15, 2026
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कटड़ा त्रासदी: सभी 34 मृतकों की पहचान हुई, हर आंख नम, हर चेहरा ग़मगीन,पोस्टमार्टम हाउस गूंज उठा परिजनों की चीखों से

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: श्री माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुई भीषण भूस्खलन में जान गंवाने वाले सभी 34 श्रद्धालुओं की पहचान कर ली गई है। शुक्रवार को 19 शवों की पहचान हुई, जबकि वीरवार को 15 शवों की पुष्टि पहले ही हो चुकी थी।

जीएमसी जम्मू के पोस्टमार्टम हाउस में जैसे ही परिजनों ने अपनों के शव देखे, वहां चीख-पुकार मच गई। सुबह से ही अलग-अलग राज्यों से परिवार के लोग शव लेने के लिए पहुंचने लगे थे। हर चेहरा ग़मगीन था, और हर आंख आंसुओं से भरी।

मुजफ्फरनगर के इंद्रपाल पर टूटा दुखों का पहाड़

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के गांव रामपुरी निवासी इंद्रपाल ने त्रासदी में अपनी पत्नी रामवीरी और बेटी आकांक्षा को खो दिया। शवों को देखते ही वे कराह उठे और कहा –”क्या पता था जीवनसंगिनी और बेटी का साथ यूं छूट जाएगा। अब कैसे जिएंगे?”

इंद्रपाल के परिवार के अन्य सदस्य भी इस हादसे में प्रभावित हुए हैं। उनके भाई रविंद्र की पत्नी ममता, भतीजी अंजलि और भाई अजय घायल हैं, जबकि अजय के बेटे दीपेश की भी मौत हो चुकी है।

दिल्ली के बुराड़ी से छह लोगों की मौत

दिल्ली के बुराड़ी इलाके के अभिषेक ने बताया कि इस हादसे में उनके परिवार के छह सदस्य काल के गाल में समा गए। इसमें उनकी भतीजी दीपांशी, बहन पिंकी, भाई राजा और अजय शामिल हैं। साथ ही रिश्तेदार तान्या और पुकार, निवासी खेड़ा धर्मपुरा (गाजियाबाद) की भी जान चली गई।

जब रामकुमारी ने अपने बच्चों और पोतियों के शव देखे, तो वे ज़ोर-ज़ोर से चीख पड़ीं। बेटे अभिषेक और मनोहर ने किसी तरह उन्हें संभाला।

श्राइन बोर्ड ने की मदद की व्यवस्था

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने मृतकों के शवों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था की है।

बोर्ड के डिप्टी सीईओ पवन कुमार ने बताया कि परिजनों को मृतकों के पास से बरामद सामान, जैसे नगदी, आभूषण और जरूरी दस्तावेज, भी सौंपे जा रहे हैं।

सवालों के घेरे में प्रशासन

त्रासदी से आहत परिजनों ने सवाल उठाया है कि जब मौसम खराब था, तब प्रशासन ने यात्रा को रोका क्यों नहीं। अब ये हादसा अलर्ट की अनदेखी और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।

कटड़ा त्रासदी ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। हर राज्य से शव लौट रहे हैं, और हर गांव में शोक की लहर है। दुख की इस घड़ी में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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