- न एसडीएम पहुंचे और न ही बीएसए
- बड़े मदरसों के संचालकों ने भी बैठक से बनाई दूरी
- बैठे रहे मदरसा संचालक नहीं किया एक भी प्रश्न
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे को लेकर प्रशासन और स्थानीय मदरसा संचालकों के बीच आयोजित बैठक सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गई। ना तो प्रशासन की तरफ से सभी अधिकारी बैठक में पहुंचे और ना ही बड़े मदरसों के संचालक और जिम्मेदार। दरअसल मदरसा संचालकों में सर्वे को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए मदरसा संचालकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विकास भवन में बैठक का आयोजन किया गया था।
मदरसों के सर्वे को लेकर जो तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है उसमें शामिल एसडीएम और बीएसए तक बैठक में नहीं पहुंचे। प्रशासन की तरफ से अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमित कुमार और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शैलेश रॉय ही पहुंचे। इसके अलावा शहर के बड़े मदरसों में से कुछ एक को छोड़ दें तो ज्यादातर जिम्मेदार नहीं पहुंचे। यहां तक कि मदरसों के मुद्दे पर बढ़ चढ़कर बोलने वाले नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन भी बैठक समाप्त होने के बाद पहुंचे।
बैठक में शामिल एडीएम प्रशासन अमित कुमार ने सभी 12 बिंदुओं पर बैठक में मौजूद मदरसा संचालकों को बारीकी से समझाया। इसके अलावा अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शैलेश रॉय ने कहा कि मदरसों की जांच नहीं सर्वे हो रहा है, ताकि सभी रिकॉर्ड दुरुस्त की जा सके। वरिष्ठ समाजसेवी सरदार सरबजीत सिंह कपूर ने सभी मदरसा संचालकों से अपील की कि वे बिना डरे और बिना झिझके अपने सभी रिकॉर्ड्स सर्वे टीम के सामने प्रस्तुत करें।
उन्होंने यह भी कहा की यह मदरसे गरीब परिवार के बच्चों की शिक्षा का माध्यम है, जोकि कौम के चंदे से चलते हैं। मदरसा दारुल उलूम के प्रधानाचार्य मौलाना रिजवान और एडवोकेट रियासत अली ने भी सभी मदरसा संचालक संचालकों से कहा कि वह सर्वे टीम को हर संभव सहयोग करें। कुल मिलाकर जिस उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई थी, प्रशासनिक अधिकारियों और मदरसों के जिम्मेदारों की गैर हाजरी के कारण उद्देश्यहीन होकर रह गई।

