जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: देश में दिवाली के उत्सव पर होने वाली आतिशबाजी पलभर की खुशी तो देती है, लेकिन सेहत पर इसका बड़ा दुष्प्रभाव होता है। ग्रीन पटाखों को छोड़ अन्य पटाखों में कई तरह के हानिकारक रासायनिक तत्व होते हैं, जो सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। आइए जानते हैं पटाखे कैसे सेहत को क्षति पहुंचा सकते हैं
हवा होती है दूषित
केजीएयमू, लखनऊ के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर यूनिट के प्रमुख डॉ. वेद प्रकाश बताते हैं कि आतिशबाजी के बाद पटाखों से निकले हानिकारक तत्व और गैसें हवा को दूषित करती हैं।
पटाखों में तांबा, जस्ता, सोडियम, सीसा, कैडमियम, सल्फर और नाइट्रोजन समेत अन्य कई तरह के दूषित तत्व होते हैं।
आतिशबाजी के बाद ये वातावरण में घुल जाते हैं। कई स्थानों पर चिपक जाते हैं, जो किसी न किसी रूप में मनुष्य के संपर्क में आता है और सेहत के लिए नुकसानदेह होता है।
महामारी में तो और भी घातक
डॉ. वेद बताते हैं कि कोरोना महामारी के दौर में पटाखा जान का दूसरा दुश्मन बन सकता है। कोरोना की चपेट में आ चुके, जिन लोगों को सांस संबंधी तकलीफ अधिक हुई या ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहे या गंभीर रहे उन्हें पटाखों से दूरी बनानी होगी। संक्रमण के कारण फेफड़ों के कार्यक्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इससे पटाखों का धुआं ऐसे लोगों के लिए और नुकसानदेह हो सकता है।
तंत्रिका तंत्र को भी खतरा
वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. विजयनाथ मिश्रा बताते हैं कि पटाखे में मौजूद सीसा तंत्रिका तंत्र के लिए घातक है। यह रक्त के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंच सकता है, जो कई तरह के गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। डॉ. मिश्रा बताते हैं कि इस दिवाली ग्रीन पटाखे जलाएं, सामान्य पटाखे जलाकर वातावरण और अपने स्वास्थ्य दोनों को नुकसान होगा।
सेहत को यूं नुकसान
- तांबा : इसके संपर्क में आने पर श्वसन तंत्र में तकलीफ होती है।
- कैडमियम : ब्लड को ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित करता है।
- जस्ता : धातु जैसी सुगंध से बुखार और उल्टी की तकलीफ।
- सीसा : तंत्रिका तंत्र को गंभीर हानि।
- मैग्नीशियम : धुएं से मेटल फ्यूम फीवर होने की आशंका बढ़ जाती है।
- सोडियम : ये रिएक्टिव तत्व है और इससे व्यक्ति जल सकता है।
रंगीन पटाखे और कैंसर
विशेषज्ञों का कहना है कि रंग-बिरंगे पटाखे जब फूटते हैं, तो उसमें से रेडियोएक्टिव युक्त जहरीले तत्व बाहर निकलते हैं। हवा में घुलकर ये दूषित कण भविष्य में कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारक बनते हैं।
नवजात के लिए खतरनाक
मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट की विशेषज्ञ डॉ. प्रीथा जोशी बताती हैं कि पटाखे से निकलने वाला धुआं और दूषित कण नवजातों और आठ साल तक के बच्चों को अधिक नुकसान पहुंचाता है। बच्चों के श्वसन तंत्र को नुकसान होता है। जिन बच्चों को सर्दी, खांसी, जुकाम और एलर्जी की तकलीफ होती है उनके लिए पटाखों का धुआं दुश्मन बन सकता है।
गले और सीने में जकड़न
पटाखों के दूषित धुएं से गले और सीने में जकड़न हो सकती है। इससे बच्चे को सांस फूलने की तकलीफ के साथ आंख में जलन, उलझन, बेचैनी और घबराहट जैसी तकलीफें हो सकती हैं।
बुजुर्ग रहें सावधान
पटाखे में मौजूद हानिकारक तत्व बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए घातक है। फेफड़ों या सांस संबंधी किसी तरह की तकलीफ से गुजरने वाले लोगों को आतिशबाजी के दौरान बाहर नहीं निकलना चाहिए। दूसरी बीमारियों से ग्रसित लोगों को भी पटाखें के कारण दूषित हुए वातावरण से बचना चाहिए।
- गर्भपात का खतरा: पटाखों से दूषित गैसें निकलती हैं। गर्भवती महिला सीधे तौर पर दूषित तत्व के संपर्क में आ जाए, तो गर्भपात का खतरा हो सकता है।
- बहरापन: एम्स ऋषिकेष में ईएनटी डॉ. एसपी अग्रवाल बताते हैं कि पटाखों की तेज आवाज बहरापन का प्रमुख कारण है। मनुष्यों के लिए 60 डेसिबल आवाज का मानक है, जबकि पटाखों की आवाज 140 डेसिबल से भी अधिक तेज होती है।
- आंखों को नुकसान: पटाखे की तेज रोशनी या बारूद आंखों तक पहुंच जाए, तो आंखों की रोशनी जा सकती है।

