Friday, February 20, 2026
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जानिए, आखिर कौन हैं ‘द रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया’, पढ़िए- पूरी खबर

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है। आज शुक्रवार का दिन भारत के लिए ना केवल बेहद अहम है बल्कि बेहद खास भी है। आज चंद्रयान-3 ( Chandrayaan-3 ) को चांद के दक्षिणी ध्रुव की उस सतह पर जाएगा, जिसके बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं है।

पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के समूह की निगाहें इस पर है। यह अभियान हमारे लिए इसलिए और खास हो जाता है क्योंकि भारत की ‘रॉकेट वूमन’ के नाम से मशहूर लखनऊ की बेटी डॉ. रितु कारिधाल (Ritu Karidhal) के इशारे पर चंद्रयान-3 श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ है।

इसरो से मिली जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-3 ( Chandrayaan-3 ) की लैंडिंग की जिम्मेदारी इस बार वरिष्ठ महिला वैज्ञानिक डॉ. रितु (Ritu Karidhal) को सौंपी गई है और वह चंद्रयान-3 की मिशन डायरेक्टर हैं।

अभियान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी. वीरा मुथुवेल हैं। इसके पहले डॉ. रितु मंगलयान की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर और चंद्रयान-2 में मिशन डायरेक्टर रह चुकी हैं। इस बार चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर नहीं बल्कि एक प्रोपल्शन मॉड्यूल है, जो किसी संचार उपग्रह की तरह काम करेगा।

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चांद-सितारों में दिलचस्पी ने बनाया ‘रॉकेट वूमन’

डॉ. रितु कारिधाल (Ritu Karidhal) का जन्म 1975 में लखनऊ के मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से उन्हें चांद-सितारों और आसमान में दिलचस्पी थी। इसरो और नासा से संबंधित समाचार पत्रों के लेख, जानकारी और तस्वीरें इकट्ठा करना उनका शौक था।

आज लॉन्च हो गया चंद्रयान-3, ISRO पर दुनिया की निगाहें

भारत की ‘राकेट वूमेन’ के नाम से मशहूर लखनऊ की बेटी डॉ. रितु कारिधाल की अगुवाई में श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-3 अंतरिक्ष के लिए रवाना किया गया। इस बड़ी उपलब्धि पर लखनऊ विश्वविद्यालय में जश्न का माहौल हैं।

‘रॉकेट वूमन’ ने लखनऊ विश्वविद्यालय से भौतिकी में एससी और एमएससी की पढ़ाई की। फिर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री लेने के लिए आईआईएससी, बंगलूरू में दाखिला लिया। डॉ. करिधाल (Ritu Karidhal) ने नवंबर 1997 से इंजीनियर के तौर पर इसरो में काम करना शुरू किया।

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GATE में किया था क्वालीफाई

रितु ने लखनऊ विश्वविद्यालय से 1994 से 1996 तक MSC की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने डॉ. मनीषा गुप्ता के अंडर में पीएचडी में दाखिला लिया। इस बीच उनका चयन GATE में हो गया। फिर वो IISC चली गईं। आगे चलकर उनका सिलेक्शन ISRO में हो गया। चंद्रयान- 2 के बाद साल 2019 में वो लखनऊ विश्वविद्यालय आई थीं। इस दौरान LU में उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजा गया। इस दौरे में वो फिजिक्स डिपार्टमेंट और लैब भी गई। उन्होंने स्टूडेंट्स से भी अनुभव साझा किए।

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