- योगी सरकार ने महिलाओं की सुविधा के लिए सार्वजनिक स्थल पर पिक शौचालय योजना का किया था अनावरण
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सरकार चाहे कितनी ही अच्छी योजनाएं ले आये, लेकिन निचले स्तर पर उन योजनाओं पर अमल होते देखना नामुमकिन ही नजर आता है। योगी सरकार ने महिलाओं की सुविधा के लिए सार्वजनिक स्थल पर पिक शौचालय योजना का अनावरण किया था। जिससे महिलाओं को खुले में शौच जाने की समस्या न हो और वह असहज महसूस न करें। बावजूद इसके मेरठ जैसे विकसित जिले में जहां सांसद, महापौर तथा पार्षद जैसे पद पर महिलाएं आसीन रही है। उसके बाद भी किसी ने इस आवश्यकता की तरफ ध्यान नहीं दिया।
महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही है। आज कोई भी क्षेत्र हो खेल, शिक्षा, राजनीति, कॉपोर्रेट, एडवोकेसी, एंटरप्रेन्योरशिप आदि जिले की महिलाएं अंतर्राष्ट्रीय पटल तक देश का गौरव बढ़ा रही है, लेकिन इसके बाद भी पुरुषों के मुकाबले उनको उपलब्ध नागरिक सुविधाओं में पुरुषों के अतिरिक्त बहुत फर्क है। जनगणना के अनुसार महिलाएं देश की आधी आबादी है।
वो वक़्त बीत गया, जब महिलाएं सिर्फ चूल्हे-चौके तक ही सीमित थी, लेकिन आज की महिला आत्मनिर्भर है। आज शहर के हर कोने-कोने में महिलाएं काम संभाल रही है, लेकिन बावजूद इसके महिलाओं के लिए शहर में कोई भी शौचालय की व्यवस्था नहीं है। जहां है वहां के हालात महिलाओं के लिए मुनासिब नहीं दिखते हैं।

अधिकतर बाजारों में शौचालय नहीं
पिंक शौचालय तो दूर की बात, शहर के कई बाजार ऐसे हैं, जहां पर शौचालय तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। शहर के प्रमुख बाजारों में एक-दो शौचालय है। इसके अलावा शहर के अन्य बाजारों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध ही नहीं है जैसे लालकुर्ती, शास्त्रीनगर सेक्टर-2, सदर, सूरजकुंड, गंगा प्लाजा, बेगमपुल, खैरनगर आदि। ये हाल तो तब है, जब यहां हजारों की तादाद में या तो महिलाएं काम करती है या खरीदारी करने आती है। शौचालय की सुविधा न होने से उनको परेशानी उठानी पड़ती है।
शौचालय का अभाव स्वास्थ्य पर प्रभाव
महिलाओं के लिए शौचालय की कमी की वजह से उनको गर्भावस्था, प्रसव तथा मासिक धर्म के दौरान खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उचित स्वच्छता व सुविधाओं से वंचित आधी आबादी को बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इनमें यूटीआई, किडनी इन्फेक्शन, कैंसर की बीमारियां शामिल है।
खुले में जाने को मजबूर
शहर के नामी बाजारों में से एक लालकुर्ती बाजार स्थित शिवाय मेडिकल स्टोर के मालिक रजत माहेश्वरी बताते है कि यहां पर न तो महिलाओं के लिए न ही पुरुषों के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। शौच के लिये पीछे खाली पड़ी जगह में जाना पड़ता है। साथ ही कई बार बाजार में खरीदारी करने आयी महिलाएं शौचालय का पता पूछने आती है तो उनको सामने मेट्रो अस्पताल में जाने को कहना पड़ता है। जिस कारण बहुत परेशानी होती है।
महिला अधिवक्ताओं के लिए हो निजी शौचालय
पूर्व उपाध्यक्ष मेरठ बार एसोसिएशन की एडवोकेट रेखा त्यागी बताती है कि कचहरी परिसर में महिला अधिवक्ताओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। जिस कारण उन्हें सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करना पड़ता है। जिसे केस में आए वादी भी इस्तेमाल करते हैं। जिस कारण से महिला अधिवक्ताओं को गंभीर बीमारियां और इन्फेक्शन आए दिन होते रहते हैं। उन्होंने डीएम दीपक मीणा के समक्ष महिला अधिवक्ताओं के लिए निजी शौचालय व एक सफाई कर्मचारी की मांग की है, लेकिन अभी तक भी कोई हल नहीं निकला है।

