Thursday, March 26, 2026
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राह से भटक रहे कर्णधार

 

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स्कूल कालेजों में अपने सहपाठियों के साथ युवाओं द्वारा हिंसक घटनाओं की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। एक ओर जहां इन घटनाओं से युवाओं के परिजन परेशान हैं, वहीं ये घटनाएं देश और समाज के लिये भी चिंता का विषय बनती जा रही हैं।

दरअसल इन घटनाओं की वजह बहुत ही साफ और सच्ची है। जो युवा ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, उन के आदर्श फिल्मी हीरो व इंटरनेट हैं। माता पिता द्वारा भ्रष्ट तरीकों से कमाये गये पैसों से ऐश ओ आराम के साथ महत्त्वाकांक्षी दुनियां की तस्वीरों के अलावा जिंदगी के वास्तविक यथार्थ बताये और दिखाये नहीं जा रहे हैं। संघर्ष करना नहीं सिखाया जा रहा। हां सब कुछ हासिल करने का ख्वाब जरूर दिखाया जा रहा है, वह भी कोई संघर्ष किये बिना। दरअसल जो युवा संघर्षशील जीवन जीते हैं उनकी संवेदनाएं मरती नहीं हैं। वे कठिन परिस्थितियों में भी निराश नहीं होते और हर विपरीत परिस्थिति से लड़ने के लिये तैयार रहते हैं।

आज देश के हर छोटे बड़े शहरों, कस्बों में कुकरमुत्तों की तरह मेडिकल डिग्री कालेज व अन्य कालेज खुल रहे हैं। बड़ी बड़ी रकमें लेकर नौजवानों को एमबीबीएस, बीडीएस, बीयूएमएस, एमबीए, बीसीए बीबीए और न जाने कितनी तरह की डिग्रियां बांटी जा रही हैं। मां बाप की काली कमाई से कुछ नौजवान डिग्री तो ले लेते हैं पर उस डिग्री की अहमियत और उस की मयार्दाओं का ध्यान ये नौजवान नहीं रख पाते।

शिक्षकों ने आज शिक्षा को व्यापार बना लिया है। आज प्राइवेट मेडिकल कालेजों में डोनेशन, बिल्ंिडग फंड व फीस की आड़ में अभिभावकों से करोड़ों का धंधा हो रहा है। बड़े घरों के लडके प्राइवेट मेडिकल कालेजों के लिये मोटी कमाई का धंधा बनते चले जा रहे है। इस सब की आम और खास वजह हैं देश में फैला भ्रष्ट राजतंत्र। आज सरकारी तंत्र और शाही तंत्र में कुछ लोग भ्रष्टाचार में इतने रच बस गये हैं कि उन्हें या उन की औलादों में कही से कही तक देश प्रेम नजर नहीं आ रहा।

आज हमारे युवाओं को अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझना चाहिये। कल जब ये युवा डॉक्टर बनकर देश के विभिन्न अस्पतालों में जायेंगे, तब तक इन के अंदर मरीजों के प्रति संवेदनाएं मर चुकी होगी। इन के लिये मरीज ग्राहक बन जायेगा और ये मरीज के लिये व्यापारी।

आज देश भर में चिकित्सा के नाम पर जो व्यापार हो रहा है वो दिल दहलाने वाला है। हमें समझना होगा कि पैसा कमाने की भागदौड़ में मरीजों में अमीर गरीब की जो दीवार हम पैदा कर रहे हैं, वो एक अपराध है जो देश और समाज के लिये बहुत ही घातक सिद्ध हो रहा है।

शादाब जफर ‘शादाब’


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