- विशेषज्ञों ने जताई नाले का पारिस्थितिक तंत्र गड़बड़ाने की प्रबल आशंका, आमजन को भी खतरा
जनवाणी संवाददाता |
किठौर: तेंदुए की गुर्राहट पर दो दिन से रेस्क्यू की जुगत में लगी वन विभाग की टीम ने मंगलवार को साइफन नाले में दो जेसीबी चलवाकर तमाम झूंड-झाड़ तहस-नहस कर दिए। तेंदुआ तो मिला नहीं, लेकिन तिनका-तिनका बिखरने से नाले में वास कर रहे न जाने कितने जलीय व जलस्थलीय जीव जंतुओं की मौत और कितनों के आशियाने लुट गए। वनाधिकारियों की इस कार्रवाई से नाले का पारिस्थितिक तंत्र गड़बड़ाने की प्रबल संभावना है। उधर, तेंदुए की निगरानी के लिए तीनों टीमें अभी मुस्तैद हैं।
रविवार शाम से साइफन नाले में रह-रहकर पूरे 24 घंटे गुर्राया तेंदुआ वन विभाग व वाइल्ड लाइफ टीम को चकमा देकर निकल गया और संसाधनों से लैस टीमें व मौके पर निर्देशन कर रहे वन अफसर रेंजर हरज्ञान सिंह, रविकांत हाथ मलते रह गए। हद तो तब हो गई, जब चंद घंटे पहले तक नाले में दलदल बता रहे दोनों रेंज अफसरों ने तेंदुए की गुर्राहट शांत होने के 15 घंटे बाद मंगलवार दोपहर सूखे नाले में रेस्क्यू के नाम पर दो जेसीबी मशीनें चलवाकर न सिर्फ नाले के झुंड-झाड़ तहस-नहस किए बल्कि न जाने कितने जलीय
व जलस्थलीय वन्यजीवों के अंडे और जान गई असंख्य जीवों सेह, अजगर, दुर्लभ फिसिंग कैट, कछुओं,पक्षियों के आशियाने तिनकों में तब्दील हो गए। वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस खुशारिया ने बताया कि नाले में बसे सेह, फिसिंग कैट, तेंदुए, सांप आदि जानवर ठिकाने उजड़ने पर बागों, गन्ने के खेतों मनुष्य के संपर्क क्षेत्र में भटकेंगे। जिससे फसलों और मनुष्यों को नुकसान का खतरा बना रहेगा।
विशेष हालात में भी गुर्राता है तेंदुआ
जीएस खुशारिया का कहना है कि तेंदुआ चोटिल होने या संकट में ही नही गुर्राता। मादा तेंदुआ सहवास के लिए वाइस काल कर उसे बुलाती है। बिछड़ जाने पर भी एक-दूसरे को बुलाने के लिए तेंदुआ रह-रहकर गुर्राता है। उन्होंने कहा कि तेंदुआ चोटिल होता तो न चल पाने के कारण पकड़ में आ जाता। उन्होंने माना कि तेंदुआ मादा के साथ था और उसे बुलाने के लिए गुर्रा रहा था। उधर, भयभीत पुलिसकर्मी और आसपास बसे अहेरिया परिवार भी तीन-चार दिन पूर्व दो तेंदुए दिखने की बात कह रहे हैं।

