Friday, March 20, 2026
- Advertisement -

चोरों की जय अर्थव्यवस्था अमर रहे

एक शहर का किस्सा है। वहीं की एक स्कूल टीचर ने अपनी नवीं क्लास के बच्चों को होमवर्क दिया—‘कल चोरी पर निबंध लिखकर लाना।’ अब बच्चे सोच में पड़ गए। कोई सोच रहा था ‘चोरी पाप है’, कोई ‘चोरी से समाज मिटता है’ लिखने वाला था। लेकिन क्लास का एक लड़का था—वो चालाक भी था और जरा-सा परसाई जी का ‘प्रश्नों का उत्तर अपने हिसाब से देना’ वाला वायरस भी उसमें घुसा था। उसने कलम उठायी और तय कर लिया—‘सब तो चोरी को गाली देंगे, मैं चोरी की आरती गाऊंगा।’

दूसरे दिन जब बच्चे कॉपी लेकर पहुंचे तो वही लड़का सीना तानकर खड़ा हो गया—‘मैडम, मैं अपना निबंध पढ़ना चाहता हूं।’ मैडम ने कहा, ‘हां बेटा, सुनाओ।’ और फिर पूरे क्लासरूम में ऐसा निबंध गूंजने लगा कि खिड़की पर बैठे कौए भी ताली पीटने लगे। उसने शुरू किया: ‘चोर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। चोर अगर न हों तो देश का आधा उद्योग बंद पड़ जाए।’ मैडम का मुंह खुला का खुला रह गया। बच्चों ने सोचा ये तो फंस गया—मैडम जबरदस्त डांट लगाएंगी। मगर लड़के ने आगे जो तर्क दिए, सुनकर सबकी हंसी छूट गई। ‘सोचिए मैडम, अगर चोर न होते, तो ताले कौन बनाता? तिजोरियां किसके लिए बनतीं? गरीब लोहार भूख से मर जाते। गोडरेज जैसा ब्रांड तो पैदा ही नहीं होता।’ क्लास तालियां पीटने लगी।

वो रुका नहीं। बोला—‘और मकान निर्माण उद्योग देखिए। चोरों ने ही मजदूरों को रोजगार दिया है। वर्ना कौन इतनी ऊंची-ऊंची दीवारें बनवाता? कौन अपने घर की खिड़कियों पर लोहे की सलाखें लगवाता? कांटेदार तार की फैक्ट्री चल रही है तो चोरों का ही आशीर्वाद है। चोर ही असली ‘रोजगार मेला’ आयोजित करते रहते हैं।’ मैडम अब हंसते-हंसते सोच रही थीं—‘ये बच्चा निबंध नहीं, अर्थशास्त्र का नया पाठ पढ़ा रहा है।’ बच्चा और धारदार हुआ। बोला—‘मैडम, चौकीदार और पुलिस वालों की नौकरी भी चोरों पर ही टिकी है। अगर चोरी बंद हो जाए तो चौकीदार कहेगा—भाड़ में जाओ, मैं क्यों रात भर ‘जागते रहो’ चिल्लाऊं? पुलिसवाले पूरे दिन थाने में ऊंघते रहेंगे, और उनकी साइड इनकम भी छिन जाएगी। दरअसल, चोर ही हैं जिनके कारण पुलिस की डंडी अब तक सीधी खड़ी है।’

आखिरी वार करते हुए उसने कहा—‘मैडम, सेकंड-हैंड मार्केट भी चोरों की देन है। चोरी हुए मोबाइल, लैपटॉप, साइकिल—यही तो नया व्यापार चलाते हैं। इंश्योरेंस कंपनियों की तो दाल रोटी चोर ही पकाते हैं। यानी, अर्थव्यवस्था के हर पायदान पर चोर खड़े हैं। इस नजर से देखें तो चोर असल में राष्ट्र निर्माता हैं। हमें तो इन्हें ‘पद्म भूषण’ देना चाहिए।’ टीचर ने कॉपी बंद कर दी और बोलीं—‘बेटा, तेरे निबंध में व्यंग्य का स्वाद है। तू सच्चाई को घुमा-फिराकर कहता है, लेकिन काटता गहरा है। तू झूठ सच में, और सच झूठ की शक्ल में दिखाता है। यही असली साहित्य है। जा, पूरे सौ में सौ नंबर।’ और पूरी क्लास चिल्ला उठी—‘चोरों की जय हो, अर्थव्यवस्था अमर रहे!’

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Jayant Chaudhary: जयंत चौधरी को जान से मारने की धमकी, असिस्टेंट को पश्चिम बंगाल से आया फोन

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी...

पश्चिम एशिया संकट: DGCA का अलर्ट, एयरलाइंस को खाड़ी हवाई क्षेत्र से बचने के निर्देश

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष...
spot_imgspot_img