
अपने बच्चों को लेकर/छोड़कर चल देने वाले ये रिश्ते आखिर किस सुख की तलाश में भटक रहे हैं? क्या इस भटकन की कोई मंजिल है? नारी नारायणी मिथक पुरातन पड़ गया है। क्या हो गया चरित्र और नैतिकता को? मुझे ऐसा लगा पीढ़ी परिवर्तन है । क्या आदत की लाचार ये पीढ़ी, संस्कारहीन और भौतिक सुखों की लालसा से भरी हुई हैं, मृगमरीचिका बनी हुई हैं और इसी तलाश में मरेगी। वर्तमान में भारत पकिस्तान के साथ दुनिया में सुर्खियां बटोर रही दोनों ही औरतों ने पहले लव मैरिज की है, अब फिर इन्हे प्यार हो गया। न इन्हे मासूम बच्चों की परवाह है? ऐसे रिश्ते सिर्फ समाज को भटकाने का काम करते है। क्योंकि इनकी देखा-देखी और बातें आएंगी आगे। ये सब इसी को स्वतंत्रता कहते हैं। उन मासूम और बेगुनाह बच्चों पर क्या बीत रही होगी। मैं तो यही सोच सोच कर दुखी हो रहा हूं। पर वो दुखी नहीं कि 15 साल की बेटी कैसे दुनिया का सामना करेगी?