Sunday, March 15, 2026
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जोर का झटका: रसोई गैस सिलेंडर में 25 रुपये का इजाफा

  • इस महीने तीन बार बढ़ चुके हैं सिलेंडर के दाम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सबका साथ और सबका विकास का दावा करने वाली सरकार ने महंगाई की मार झेल रहे लोगों को एक और झटका लगा है। रसोई गैस के दामों में गुरुवार को फिर से बढ़ोतरी हुई है। तेल कंपनियों ने रसोई गैस के दाम 25 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ा दिए हैं। मेरठ में 14.2 किलो गैस सिलेंडर की नई कीमतें अब 792 रुपये हो गई हैं। पहले यह सिलेंडर 767 का मिलता था। नई कीमतें गुरुवार से ही लागू हो गई हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक मेरठ में 14.2 किलो के रसोई गैस सिलेंडर के दाम अब 792 रुपये हो गए हैं। पहले इसकी कीमत 767 रुपये प्रति सिलेंडर थी। रसोई गैस के दाम अभी हाल में ही 50 रुपये बढ़े थे। रसोई गैस सिलेंडर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इस महीने यानी फरवरी में अब तक रसोई गैस के दामों में तीन बार बढ़ोतरी हो चुकी है। तेल कंपनियों ने 4 फरवरी और 14 फरवरी को गैस के दामों में इजाफा किया था। इसके बाद अब एक बार फिर से इसके दाम बढ़ने से आम जनता पर इसका सीधा असर पड़ेगा। लोगों को महंगाई से बहुत जल्द राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। दरअसल, पेट्रोल और डीजल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।

इसके दाम बढ़ने का साफ असर वाहन चालकों पर पड़ा है। वहीं, माल ढुलाई का भाड़ा बढ़ने से आम लोगों के जरुरत की चीजें भी महंगी हुई हैं। ऐसे में राज्य व केंद्र सरकार की तरफ से अपने-अपने शुल्क में असर पड़ने लायक कटौती के बगैर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से राहत नहीं मिलने वाली है। सबसे ज्यादा मार रसोई में पड़ी है। बजट के बाद से लोगों को राहत मिलने के बजाय मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है।

एक फरवरी को छोड़ दिया जाए तो दो फरवरी से लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े और सबसे ज्यादा असर रसोई गैस सिलेंडर ने डाला। भारत गैस, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडेन के सिलेंडर मंहगे होने से गरीब वर्ग पर बुरा असर पड़ा है।

दरअसल जिन लोगों ने बुधवार को सिलेंडर खरीदा था उनको 767 रुपये में मिला था जब सिलेंडर देने वाले घर आए और 792 रुपये मांगे तो लोग हैरत में पड़ गए। कुछ जगहों पर बहस भी हुई। महिलाओं ने रसोई गैस के दाम बढ़ाने पर सरकार को जमकर कोसा और कहा कि मंहगाई कम करना तो दूर अब खाना बनाने पर भी पाबंदी लगाई जा रही है। पहले लोगों को सब्सिडी मिल जाती थी तो थोड़ी बहुत राहत मिलती थी, लेकिन अब वो बंद होने से गरीब और मध्यम वर्ग पर आयल कंपनियों ने तगड़ा झटका दिया है।

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