- क्षेत्रीय वन अधिकारी ने रेंजर से रिपोर्ट तलब की
जनवाणी संवाददाता |
ऊन: एक ओर जहां प्रदेश की योगी सरकार वृक्षारोपण पर जोर दे रही है, वहीं पेड़ काटने वाले माफिया पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर हरियाली महोत्सव मनाती है लेकिन माफिया पुलिस और वन विभाग की मिलीभगत से हरे भरे और फल देने वाले पेड़ों को काटकर अपनी जेब गर्म कर रहे हैं।
ऐसा ही मामला ऊन तहसील क्षेत्र का सामने आया है जहां चौकी व तहसील से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर 50 से भी ज्यादा पेड़ों को जड़ से रातों-रात काट दिया गया। ऊन से चीनी मिल मार्ग पर जाने वाली सड़क पर 50 से भी ज्यादा हरे भरे आम के पेड़ खड़े थे लेकिन पेड़ माफियाओं ने पुलिस प्रशासन एवं वन विभाग से मिलीभगत कर छायादार हरे-भरे फल देने वाले आम के पेड़ों को रातों-रात काट दिया गया।
योगी सरकार हरे-भरे पेड़ लगाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन पेड़ माफिया इन्हीं हरे भरे पेड़ों को काटकर अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं। साथ ही, पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हर वर्ष करोड़ों रुपये की योजनाएं चलाकर ग्राम प्रधानों व नगर पंचायत स्तर पर पेड़ वितरित कर लोगों को पेड़ लगाने के लिए जागरूक किया जाता है जिससे पर्यावरण शुद्ध रहे और पर्यावरण को कोई नुकसान ना पहुंचे लेकिन माफियाओं वह अधिकारी खुलेआम सरकार के निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं तथा हरे भरे पेड़ काटकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
इस संबंध में क्षेत्रीय वन अधिकारी एनके पाल ने बताया कि विभाग की ओर से पेड़ काटने की कोई अनुमति नहीं दी गई है। वन रेंजर को मौके पर जाकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

